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'AAP की जीत मोदी के लिए राजनीतिक भूकंप'

Wed, 11 Feb 2015 01:34 PM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन Updated Wed, 11 Feb 2015 01:34 PM IST
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Delhi Election result 2015 analysis by American Media

अमेरिकी अखबारों ने दिल्ली चुनाव परिणामों को एक भ्रष्टाचार विरोधी छोटी सी पार्टी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त हार के तौर पर पेश किया है।

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न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे नरेंद्र मोदी के लिए एक राजनीतिक भूकंप कहा है। अखबार का कहना है कि जहां नरेंद्र मोदी ने अपने विदेशी दौरों में एक के बाद एक कामयाबी हासिल की है, वहीं देश की अर्थव्यवस्था में उनके शासन में अभी तक कोई खास सुधार नजर नहीं आया है।
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अखबार का कहना है कि भारत में हर साल एक करोड़ 20 लाख नए लोग रोज़गार पाने की दौड़ में शामिल हो रहे हैं लेकिन मोदी सरकार उनके लिए गिनी-चुनी नौकरियां ही पैदा कर पाई है। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार विरोधी संदेश ने नौजवान तबके को अपनी ओर खींचा है।
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साथ ही जिस नरेंद्र मोदी ने नौ महीने पहले अपनी चायवाले की छवि जनता के सामने रखकर जीत हासिल की थी, वही मोदी अब 10 लाख रूपये से ज़्यादा कीमत वाला सूट पहने नजर आते हैं जबकि केजरीवाल "मफलर मैन" के नाम से जाने जाते हैं जो छवि आम आदमी के ज्यादा करीब नजर आती है।

क्या कहता है वाशिंगटन पोस्ट?

Delhi Election result 2015 analysis by American Media

वॉशिंगटन पोस्ट ने भी कुछ इसी तर्ज पर लिखा है कि जहां मोदी अपने हेलिकॉप्टर में बैठकर बड़ी-बड़ी चुनाव सभाओं में पहुंचकर भाषण दे रहे थे, वहीं केजरीवाल गली-कूचों में छोटी-छोटी सभाओं में स्थानीय मु्द्दों पर बात कर रहे थे।

चुनाव से ठीक पहले जहां मोदी मंहगे-मंहगे सूट पहनकर ओबामा के साथ चौबीसों घंटे मीडिया में नज़र आ रहे थे, वहीं केजरीवाल झुग्गी-झोपड़ियों में, तंग-गलियों में अपने सिर पर मफलर लपेटकर आम लोगों के साथ रिश्ता बनाने में जुटे हुए थे।

अखबार का कहना है कि इस चुनाव को काफ़ी हद तक मोदी के राजनीतिक वर्चस्व के इम्तहान की तरह देखा जा रहा था लेकिन एक छोटी सी पार्टी ने उन्हें करारी मात दी है।

वॉल स्ट्रीट जरनल

वॉल स्ट्रीट जरनल का कहना है कि एक भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी के हाथों मोदी को करारी राजनीतिक शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। अख़बार का कहना है कि केजरीवाल अब एक अहम राजनीतिक मंच पर हैं और दोनों ही नेता भ्रष्टाचार के ख‌िलाफ माने जाते हैं लेकिन दोनों की राजनीतिक शैली इतनी अलग है कि आनेवाले दिनों में दोनों में खासा टकराव नजर आ सकता है।

अख़बार का कहना है कि आम आदमी पार्टी की इस जीत की बदौलत आनेवाले दिनों में केजरीवाल, मोदी की आर्थिक नीतियों और दक्षिणपंथी रूझान वाली पार्टी के ख़िलाफ़ एक गठबंधन खड़ा करने की हैसियत रखते हैं।

इसके अलावा जनता ने केजरीवाल में वही विश्वास दिखाया है जो लोकसभा चुनाव में उन्होंने मोदी में दिखाया था।

लॉस ऐंजल्स टाइम्स में त्रिलाकपुरी दंगा

Delhi Election result 2015 analysis by American Media

अमेरिकी मीडिया में हाल के दिनों में भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के ख‌िला़फ हुए हमलों का भी खासा ज‌िक्र रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने तो इस पर काफी सख़्त संपादकीय भी लिखा था।

वॉल स्ट्रीट जरनल ने लिखा है कि लोकसभा में भाजपा को मिली भारी जीत के बात हिंदूवादी ताकतों ने एक आक्रामक रूख अपनाया, खासतौर से मुसलमानों के ख‌िलाफ और संभव है कि ये भी दिल्ली में भाजपा के ख‌िलाफ गया हो।

लॉस एंजिलिस टाइम्स ने भी दिल्ली में चर्चों पर हुए हमले और त्रिलोकपुरी में हुए दंगों का ज़िक्र किया है और लिखा है कि शायद वोटर हिंदू कट्टरपंथियों की बढ़ती ताक़त से घबरा गए हैं।

अख़बार ने आम आदमी पार्टी के समर्थकों की एक बड़ी सी तस्वीर भी प्रकाशित की है और लिखा है- ज़ाहिर है कि नौ महीनों में मोदी ने जो आर्थिक मंत्र सामने रखा है वो दिल्ली की जनता को मुग्ध नहीं कर पाया।

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