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आठ महीने में ही बजने लगी खतरे की घंटी

Sun, 08 Feb 2015 11:15 AM IST
Updated Sun, 08 Feb 2015 11:15 AM IST
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delhi election is warning msg for modi govt

लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को कांग्रेस के सालों के राज के खिलाफ सत्ता विरोधी लहरों के चलते जीत मिली। मगर दिल्ली में मोदी सरकार के आठ महीने के राज के बाद ही राजधानी की जनता भाजपा को नकारती दिख रही है।

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एग्जिट पोल के नतीजों में जनता का मोदी सरकार को लेकर मोह कम होता दिख रहा है। दिल्ली में भले अभी तक राष्ट्रपति शासन लागू है, मगर दिल्ली की कमान परोक्ष रूप से मोदी सरकार के हाथों में ही है। केंद्र सरकार का हर फैसला सीधे तौर पर दिल्ली की जनता को प्रभावित करता है।
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इसलिए मोदी सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या आठ महीने के भीतर ही केंद्र सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर शुरू हो गई है। यूपीए सरकार के दस साल तक सत्ता में काबिज रहने के बाद भाजपा को मई, 2014 में स्पष्ट बहुमत मिला था। लोगों में दस साल के कांग्रेस के राज के खिलाफ बेहद ज्यादा गुस्सा था।

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दिल्‍ली के नतीजों से थमता दिख रहा विजय रथ

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उसके बाद महाराष्ट्र में भी 15 साल तक राज करने के बाद कांग्रेस को हार मिली। हरियाणा में भी दस साल राज करने के बाद कांग्रेस को भाजपा के हाथों हार मिली। उसके बाद जम्मू-कश्मीर और झारखंड में भी वहां की सरकारों के खिलाफ लोगों ने गुस्सा निकाला। दिल्ली में नवंबर, 2013 तक कांग्रेस ने 15 साल तक राज किया।

उसके बाद पार्टी को बड़ी हार मिली। मगर भाजपा सत्ता में नहीं आ सकी। पिछले चुनाव में भाजपा को 32 तो आम आदमी पार्टी को 28 सीटें मिली थी। तब से अब तक दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू है।

मोदी सरकार ने 26 मई, 2015 को केंद्र की सत्ता हाथ में ली थी। तब से दिल्ली में आठ महीने से ज्यादा समय से मोदी सरकार ही परोक्ष तौर पर राज कर रही है। एग्जिट पोल के नतीजों की मानें तो दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजय रथ थम रहा है।

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