जनता दरबार से केजरीवाल ने क्यों की तौबा?
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दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से सचिवालय के बाहर पहली बार लगाए गए जनता दरबार में उमड़ी भीड़ और उसके बाद मची अफरा-तफरी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा फैसला किया है।
सोमवार को केजरीवाल ने साफ कर दिया कि अब दिल्ली में आगे जनता दरबार नहीं लगाया जाएगा। यह ऐलान खुद मुख्यमंत्री की तरफ से किया गया है।
केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वह हफ्ते में एक बार जनता से मुलाकात करेंगे, लेकिन इस दौरान जनता से आग्रह है कि वह कोई शिकायत न लेकर आए। उनका कहना है कि शिकायतों के लिए कॉल सेंटर और हेल्पलाइन का इंतजाम किया जाएगा।
शनिवार को सचिवालय के बाहर मचा बवाल
दिल्ली सचिवालय के बाहर शनिवार को लगाए गए जनता दरबार में इतनी ज्यादा भीड़ पहुंच गई कि प्रशासन के सारे इंतजामात धरे के धरे रह गए थे। भीड़ बेकाबू हो गई और सुरक्षा घेरा, बैरिकेड तोड़ दिए। ऐसी अफरा-तफरी मची कि शिकायत करने पहुंचे लोगों के दस्तावेज सड़क पर बिखरे पड़े थे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट के दूसरे मंत्री मौजूद थे, लेकिन वहां मौजूद लोग कुछ सुनने-समझने को तैयार नहीं थे। बहुत से लोग ऐसे थे, जो किसी शिकायत के साथ नहीं आए थे। वे सिर्फ केजरीवाल को बधाई देना चाहते थे।
बेकाबू भीड़ की वजह से इतनी अव्यवस्था थी कि लोगों के जरूरी दस्तावेज तक गायब हो गए। हालात काबू न आते देख दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केवल 15 मिनट वहां रुकने के बाद रवाना हो गए।
धरना देने लगे थे लोग
दिल्ली सचिवालय के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी चीजों को संभालने की काफी कोशिश कर रहे थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
अरविंद केजरीवाल के वहां से जाने के बाद कुछ लोग धरना देकर बैठ गए। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्या का हल नहीं मिलेगा, वे वहां से नहीं जाएंगे।
दिल्ली सचिवालय के बाहर जुटी भीड़ केवल दिल्लीवासियों की नहीं थी। पड़ोसी राज्यों से भी लोग अपनी समस्याएं लेकर आए थे। उनका कहना था कि अरविंद केजरीवाल उनकी दिक्कतें भी दूर कर सकते हैं।
पहले चले गए, फिर लौट आए केजरीवाल
केजरीवाल ने ऐलान किया था कि हर शनिवार मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट सचिवालय के बाहर लगने वाले जनता दरबार में लोगों की दिक्कतें सुनेंगे और समाधान देने की कोशिश करेंगे।
लेकिन मुख्यमंत्री या उनकी टीम को इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि ऐलान करने के बाद शनिवार सवेरे सचिवालय के बाहर ऐसा हुजूम लग जाएगा। यही वजह है कि पहले से किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हुए।
सचिवालय के बाहर हालात बिगड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल वहां से चले गए थे। कुछ देर बाद वह फिर आए और सचिवालय की दीवार के दूसरी तरफ से बाहर सड़क पर खड़े लोगों को आश्वासन दिया कि वे संयम बरतें, तो सभी की मुश्किल सुनी जाएगी। उस वक्त सड़क पर खड़े लोगों ने केजरीवाल को अपनी शिकायतें और दूसरे दस्तावेज थमाने शुरू कर दिए।
जब छत पर चढ़े दिल्ली के सीएम
इसके बाद केजरीवाल और उनकी टीम सचिवालय की छत पर चली गई। केजरीवाल ने वहां से कहा कि ठेके पर काम करने वाले लोगों की समस्याओं पर गौर किया जाएगा। उन्होंने भीड़ से कहा कि जल्द ही दूसरा जनता दरबार लगाया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें इतनी ज्यादा भीड़ का अंदाजा नहीं था। भीड़ बेकाबू हो गई। उन्होंने कहा, "आज हमारा पहला दिन था। जहां मैं बैठा था, वहां शिकायतें लेने के बाद भी लोग नहीं हट रहे थे। इंतजाम में कमी रह गई।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे निकलना पड़ा, क्योंकि लोग मेरी टेबल पर भी चढ़े थे। भीड़ थी, जो बात नहीं सुन रही थी। हमें दूसरे तरह से इंतजाम करना पड़ेगा। लोगों को कतार में खड़ा होकर शिकायतें बतानी होंगी। वरना धक्का-मुक्की में गड़बड़ हो सकती है।"
कही थी जगह बदलने की बात
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने तब कहा था, "जनता दरबार की जगह भी बदली जा सकती है। केजरीवाल ने कहा कि बहुत से ऐसे लोग थे, जो बधाई देने आए थे। हाथ मिलाने आए थे।"
केजरीवाल ने कहा था, "अगर मैं वहां से नहीं निकलता, तो भगदड़ मच सकती थी। मंत्री अपनी-अपनी टेबल पर बैठे थे। लेकिन लोगों की भीड़ मेरी तरफ ज्यादा थी। मैं सहमत हूं कि सभी लोग मुझसे मिलना चाहते थे। मैं घबराया गया।"
दिल्ली के सीएम ने कहा था, "अफसरों के साथ बैठकर इस पर चर्चा होगी। सोमवार-मंगलवार को जनता दरबार नहीं लगेगा। दो-तीन दिन रुकना होगा और इंतजाम में सुधार की जरूरत है। लोगों की उम्मीदें बहुत हैं। मैंने भी गौर किया कि सरकारी कर्मचारी काफी निराश हैं। किसी की पेंशन नहीं मिली, किसी को स्थायी नहीं किया गया। सरकारी कर्मचारी, सरकार से ज्यादा नाराज हैं।"