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संघ ने भी उठाई BJP के केंद्रीय नेतृत्व पर उंगली

Mon, 09 Feb 2015 08:20 AM IST
Updated Mon, 09 Feb 2015 08:20 AM IST
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delhi assembly election, RSS not happy to bjp leaders

राजधानी दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में अंदरखाने मंथन जारी है। सभी एग्जिट पोल में भाजपा पर आम आदमी पार्टी की बढ़त के लिए संघ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और अति आत्मविश्वास को जिम्मेदार मान रहा है।

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संघ का आकलन है कि स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज कर अचानक किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लगातार नकारात्मक प्रचार के चलते पार्टी की चुनावी संभावना गड़बड़ाई है। हालांकि अभी भी संघ का मानना है कि भाजपा 34 सीटें हासिल कर सकती है।
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इस बीच कई उम्मीदवारों ने रविवार को केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई बैठक में स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं से पूरा सहयोग नहीं मिलने की भी शिकायत की है। दिल्ली इकाई के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि नेतृत्व ने इस चुनाव में उनकी कोई भी भूमिका तय नहीं की थी।
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बाहरी नेताओं से तालमेल नहीं बैठा सके कार्यकर्ता

delhi assembly election, RSS not happy to bjp leaders

चूंकि उच्च स्तर से लेकर बूथ स्तर पर रणनीति बनाने के लिए बाहरी राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी, इसलिए प्रचार के बाद मतदान के दौरान भी कार्यकर्ताओं से सीधा तालमेल नहीं बैठ पाया।

निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ ठीक से तालमेल न बैठ पाने के कारण मतदान से ठीक एक दिन पहले खुद संघ को मोर्चा संभालना पड़ा। तमाम एग्जिट पोल में आप को भाजपा पर बढ़त के अनुमान के बावजूद संघ ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है।

उसे लगता है कि अगर सब कुछ उसकी उम्मीदों के अनुरूप रहा तो भाजपा 34 सीटें हासिल कर सकती है। संघ के मुताबिक, 16 सीटों पर भाजपा-आप में कड़ी टक्कर है, वहीं 20 सीटों पर आप का पलड़ा भारी है।

बेदी को उम्‍मीदवार बनाने से भी हताश हुए कार्यकर्ता

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हालांकि संघ चुनाव की तैयारियों और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति से बेहद खफा है। उसका मानना है कि बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद न केवल कार्यकर्ता हताश हुए बल्कि स्थानीय नेताओं में भी नाराजगी घर कर गई।

संघ की नाराजगी का एक बड़ा कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष दूर करने के लिए ठोस प्रयास न किया जाना और स्थानीय नेताओं को रणनीति तय करने की प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखने का फैसला भी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता निजी तौर पर हार स्वीकार कर रहे हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि पार्टी की उम्मीद मध्य वर्ग और वैश्य समुदाय पर टिकी हुई थी। मगर इन दोनों ही जगह आप ने सेंध लगा ली। इसके अलावा कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं ने करीब करीब पूरी तरह आप का दामन थाम लिया।

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