कांग्रेस को दिल्ली में सता रहा एक बड़ा डर
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ज्यादातर सर्वेक्षणों में दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत खस्ता दिखाई गई है। कांग्रेस के शीर्ष नेता सिर्फ इस चुनाव में ही नहीं बल्कि आगे भी पार्टी के भविष्य को गर्दिश में मान रहे हैं।
बड़े नेताओं के आकलन को माने तो दिल्ली में पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसी होने जा रही है। इन राज्यों में कांग्रेस के वोट बैंक पर क्षेत्रीय दल कब्जा कर चुके हैं और पार्टी का वजूद ही संकट में है।
दिल्ली में पार्टी के वोट बैंक का झुकाव आम आदमी पार्टी की तरफ हो रहा है। पार्टी का मानना है कि दिल्ली की स्थिति का असर हरियाणा और पंजाब में भी पड़ सकता है।
दिल्ली में सिमट रहा पार्टी का जनाधार
कांग्रेस ने दिल्ली में 1998 से लेकर 2013 तक लगातार 15 साल शासन किया। मगर मौजूदा वक्त में पार्टी नेता खुद स्वीकार कर रहे हैं कि कांग्रेस के जनाधार में बहुत कमी आई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजधानी में निचला तबका और मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस से छिटक चुका है।
पिछले चुनाव के मुकाबले ये वोट बैंक इस बार पार्टी से और दूर हो सकता है। हालांकि कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में राहुल गांधी के रोड शो से कुछ स्थिति संभली है लेकिन वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी की ओर जा चुका है। इसकी वापसी इस चुनाव में होना बेहद मुश्किल है।
पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि अगर भाजपा को शिकस्त देकर आप सत्ता में आ गई तो कांग्रेस के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल और बदतर हो सकती है। पार्टी के लिए आगामी पांच साल खुद को विपक्ष में बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।