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रक्षा मंत्री के निशाने पर हैं कौन से पूर्व पीएम?

Sat, 24 Jan 2015 12:35 PM IST
Updated Sat, 24 Jan 2015 12:35 PM IST
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defence minister manohar parrikar asked any question about former prime minister role

रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने भले ही पाकिस्तान में भारतीय खुफिया तंत्र को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार पूर्व प्रधानमंत्रियों का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन खुफिया एजेंसियों के अनुसार, उनका इशारा आई के गुजराल की तरफ है। वर्ष 1997-98 में हुए एक फैसले से खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी के अधिकारियों में आज भी नाराजगी है।

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ये अधिकारी इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को भी दोषी मानते हैं। देसाई ने 70 के दशक के अंतिम दौर में पाकिस्तान के नाभिकीय कार्यक्रम के खिलाफ सफलतापूर्वक चल रहे रॉ के ऑपरेशन ‘काहुटा’को अचानक रोक दिया था। एजेंसी में व्याप्त नाराजगी की एक वजह यह भी है कि इन राजनीतिक फैसलों के चलते पाकिस्तान में उनके कई एजेंटों को पाक ने मार दिया।
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खुफिया अधिकारी परिकर के बयान को तर्कसंगत करार दे रहे हैं। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि गुजराल सिद्धांत (डॉक्ट्रिन) का सबसे बड़ा खामियाजा पाकिस्तान में मजबूत रॉ के नेटवर्क का कमजोर होना है।
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कई खुफिया कार्यक्रमों को किया गया बंद

defence minister manohar parrikar asked any question about former prime minister role

गुजराल ने अपने ग्यारह महीने के कार्यकाल में रॉ के पाकिस्तान स्पेशल ऑपरेशन डेस्क को निष्क्रिय कर दिया था। इसकी वजह से वहां से खुफिया इनपुट आना लगभग बंद हो गए। इतना ही नहीं वहां चल रहे रॉ और आईबी के कई ऑपरेशन अचानक दिशाहीन हो गए। सूत्रों के मुताबिक इस गफलत में अपने कई एजेंट पहचान में आ गए और उनकी हत्या कर दी गई।

इस अधिकारी ने बताया कि 1977-79 के बीच मोरारजी देसाई ने रॉ के एक ऑपरेशन काहुटा को रोक ऐतिहासिक गलती की थी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के नाभिकीय कार्यक्रम के खिलाफ इस ऑपरेशन की इजाजत दी थी। हमारे एजेंटों ने काहुटा के खान रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों के बालों की वैज्ञानिक जांच से पता किया था कि वहां नाभिकीय काम चल रहा है।

यह बाल उस सैलून से हासिल किए गए थे जहां वह पाक वैज्ञानिक बाल कटवाने जाता था। अधिकारी ने यह खुलासा भी किया कि देसाई ने पाक के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उल-हक से कह दिया था कि भारत को उनके नाभिकीय कार्यक्रम के बारे में पता चल गया है। अधिकारी के मुताबिक उसकी प्रतिक्रिया में पाक एजेंसी ने हमारे करीब छह एजेंटों को खोजकर कर मार दिया।

क्या कहा था परिकर ने

रक्षा मंत्री परिकर ने कहा था कि पाकिस्तान में खुफिया नेटवर्क यानी डीप एसेट तैयार करने में 20 से 30 साल लग जाते हैं। कुछ ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं जिन्होंने इस तरह के डीप एसेट को खतरे में डाल दिया था।

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