फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   'deendayal upadhyaya was against hindu muslim unity'

'हिंदू- मुस्लिम एकता के खिलाफ थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय'

Tue, 03 Nov 2015 02:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 03 Nov 2015 02:17 PM IST
विज्ञापन
'deendayal upadhyaya was against hindu muslim unity'

एक ओर देश में जहां असहनशीलता के माहौल पर बहस छिड़ी हुई है, वहीं संघ की पुस्तक राष्ट्र धर्म में छपे एक लेख ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

विज्ञापन


इस लेख में कहा गया है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदू- मुस्लिम एकता के खिलाफ थे। साथ ही एकता का मुद्दा सिर्फ देश के मुसलमानों को खुश करने के लिए उठाया जा रहा है।
विज्ञापन


लेख 'मुस्लिम समस्याःदीनदयाल जी की दृष्टि में' को राष्ट्र धर्म के स्पेशल एडिशन में जगह दी गयी है। इसे डाक्टर महेश चंद्र शर्मा ने लिखा है।

इसमें पंडित जी के जीवन से जुड़े लेख और वाक्यों का स्थान दिया गया है। इसका विमोचन केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

'लेख में छपे तथ्यों से सहमत हूं'

'deendayal upadhyaya was against hindu muslim unity'

इस मौके पर कलराज मिश्र ने कहा कि मैं ‌लेख में छपे तथ्यों से सहमत हूं और ये सही है कि मुस्लिम कभी हिंदुओं संग मिलकर नहीं रहते हैं, वह तो अन्य धर्मों के लोगों जैसे सिख और पार्सियों से भी लड़ते रहते हैं।

राम मनोहर लोहिया भी उपाध्याय के सोच से सहमत थे। ये जरूरी है कि हमें इतिहास से सीखना चाहिए ताकि वर्तमान और भविष्य भेहतर हो सके। कलराज ने कहा कि भारत की पहचान भारतीयता के कारण है। इसीलिए केंद्र सरकार उसी मार्ग पर चल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी विश्व को भारतीयता का एहसास दिलाने में सफल रहे हैं। कुछ लोगों को इसी से पीड़ा हो रही है। भाजपा का मार्ग पं. दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन पर आधारित है, जो समाज में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को स्वावलंबी व स्वाभिमानी बनाना चाहते थे।

उन्होंने कहा, ‘जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं, उन्हें लगने लगा है कि पं. दीनदयाल का सपना साकार करने वाली सरकार सत्ता में बैठी है। कहीं यह अपने मकसद में कामयाब न हो जाए। इसी से ये लोग परेशान हैं।’

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed