बैमौसम गर्मी की मार, गेंहूं व सरसों के उत्पादन में गिरावट की आशंका
बेमौसम गर्मी से रबी की मुख्य फसल गेहूं के उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। किसानों व कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से अधिक गर्मी पड़ने से गेहूं की फसलें समय से पहले परिपक्व हो जाएंगी और इससे उपज में कमी आएगी।
हालांकि किसान यह भी कह रहे हैं कि अभी बारिश हो जाती है और तापमान में गिरावट आ जाती है तो यह नुकसान कम होगा। उत्तर भारत के गेहूं उत्पादक इलाके में दिन का तापमान सामान्य से लगभग 7 डिग्री तो रात का सामान्य से 5 डिग्री तक अधिक चल रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के महासचिव चौधरी युद्धबीर सिंह कहते हैं, तापमान में इस प्रकार की बढ़ोतरी से सिर्फ गेहूं ही नहीं सरसों की फसल भी प्रभावित होगी।
आम तौर पर इस दौरान पड़ने वाली ओस व धुंध की नमी से गेहूं व सरसों की फसल को काफी लाभ मिलता है जो तापमान अधिक होने से नहीं मिल रहा है।
तापमान अधिक होने से सरसों में समय से पहले फूल निकल आए हैं। मौसम ऐसा ही रहा तो गेहूं के उत्पादन में निश्चित रूप से कमी आएगी। मोदी नगर इलाकेके किसान व भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष (मेरठ) राजबीर सिंह कहते हैं, इस प्रकार की गर्मी से गेहूं के दाने पर असर पड़ेगा और उत्पादन में कमी आएगी।
सिंह ने बताया कि पिछले साल फरवरी-मार्च में बैमौसम बारिश की वजह से गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी और इस साल बिना मौसम की गर्मी की वजह से ऐसा हो रहा है।
गेंहूं व सरसों के उत्पादन में गिरावट की आशंका
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (पूर्वी क्षेत्र) के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पुष्पनायक कहते हैं, रबी की फसलों को इस दौरान सर्दी के मौसम की जो नमी मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल रही है। इससे परिपक्वता की अवधि छोटी हो जाएगी और उत्पादन पर फर्क पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ गेहूं ही नहीं, हर प्रकार की रबी फसलों पर इसका असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ठंडे मुल्क के निवासी जब गर्म प्रदेश में आते हैं तो कई प्रकार के चर्म रोग हो जाते हैं, वैसे ही ठंड की फसल को गर्मी मिलेगी तो उसका असर पड़ेगा।
वर्ष 2104-15 में गेहूं का उत्पादन 889.5 लाख टन रहा, जबकि इससे पहले वाले वर्ष में गेहूं का उत्पादन 958.5 लाख टन था। गेहूं की बुवाई का काम नवंबर के आस-पास आरंभ होता है और अप्रैल तक फसल तैयार हो जाती है।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस साल दिसंबर तक 271.4 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई जो कि वर्ष 2014 के दिसंबर के मुकाबले 20 लाख हेक्टेयर कम है।