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मोदी की अमेरिकी यात्रा को लेकर लेफ्ट-राइट में छिड़ी जंग

Wed, 02 Sep 2015 02:03 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 02 Sep 2015 02:03 PM IST
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debate between left and right on next foreign trip on narendra modi

इस महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका जा रहे हैं। मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान जहां यूएन जनरल असेंबली में भाषण देंगे वहीं कैलिफोर्निया और सिलिकॉन वैली भी जाएंगे।

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27 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी करीब 40 हजार लोगों को संबोधित करेंगे। लेकिन मोदी के इस कार्यक्रम को लेकर वहां दो पक्षों में बहस हो रही है। मानवाधिकार समेत अन्य मुद्दों को लेकर वामपंथी धड़ा जहां उनके इस कार्यक्रम का विरोध कर रहा है, वहीं दक्षिणपंथी पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं वामपंथी धड़े ने एक पिटीशन भी दायर की है। इस पिटीशन को सिलकॉन वैली स्थित कंपनियों जिसमें, गूगल, एप्पल, टेसला शामिल हैं, उनके टॉप सीइओ को संबोधित एक पिटीशन में कहा गया है कि मोदी सरकार के साथ व्यवसाय करना सही नहीं होगा क्योंकि उन पर मानवाधिकार हनन और नागरिक स्वतंत्रता खत्म करने का आरोप है।
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भारतीय भी विरोध में शामिल

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पिटीशन में यह भी कहा गया है कि मोदी सरकार ने शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों को भी नुकसान पहुंचाया है। इस पिटीशन पर 120 एकेड्मिक्स ने अपने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कई भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं।

पिटीशन पर हस्ताक्षर करने वालों की सूची में अमेरिका के वेंडी डोनियर और शेल्डन पोलॉक भी शामिल हैं। पिटीशन पर हस्ताक्षर करने वाले एकेड्मिक्स का मानना है कि डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी है।

उनका मानना है कि जहां एक ओर इस प्रोजेक्ट में लोगों की निजता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है वहीं इसमें लोगों की निजी जानकारियों का गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

ये भी हैं आरोप

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पिटीशन में कहा गया है कि जो लोग सिलकॉन वैली में रहते हैं और यहां काम भी करते हैं उनकी जिम्मेदारी है कि वे भारत सरकार से यह मांग करे कि वे इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अपने डिजिटल फ्यूचर की प्लानिंग तैयार करें।

पिटीशन में यह बात भी कही गई है कि मोदी सरकार ने अपने पहले साल में सेंसरशिप को बढ़ावा दिया है और एनजीओज को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। पिटीशन में FTII, नालंदा विश्वविद्यालय,नेशनल बुक ट्रस्ट, और India Council Of Historical research में अयोग्य लोगों की नियुक्तियों के बारे में बात कही गई है।

पिटीशन में सरकार पर यह भी आरोप लगाया है कि विदेशी छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार और कॉंफ्रेंस में आने से भी रोका जा रहा है।  

बरती जा रही सावधानी

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वामपंथी धड़े के इन आरोपों को दक्षिणपंथी पक्ष ने बकवास बताया है। यह बहस सोशल मीडिया पर भी चल रही है कि किस तरह से 'लेफ्टिस्ट प्रोपैगैंडा ' का जवाब दिया जा सके।

दक्षिणपंथी पक्ष का कहना है कि मोदी सरकार पर इस तरह के आरोप गलत हैं और नागरिकों पर जिस सर्विलांस का शक जताया जा रहा है वह प्रोजेक्ट पूर्ववर्ती UPA सरकार के समय में मंत्री रहे कपिल सिब्बल द्वारा बनाया गया था।

दक्षिणपंथी पक्ष ने इसे लेफ्टिस्ट प्रोपैगैंडा करार देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को केवल अमेरिकी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने इज्जत दी है, लेकिन इस इज्जत से कुछ लोगों को खासी परेशानी हो रही है।

लेफ्ट और राइट की इस बीच बहस में प्रधानमंत्री मोदी की टीम ने दौरा किया है। जिसमें यह तय किया गया है कि बर्कले या स्टेनफोर्ट में मोदी के कार्यक्रम नहीं रखे जाएंगे क्योंकि वहां विवाद की आशंका है। मोदी के इस दौरे को लेकर सावधानी भी बरती जा रही है।

विवादों से बचने के लिए ही यह फैसला किया गया है कि प्रधानमंत्री यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल में तो भाषण देंगे लेकिन वे द इंडस एंट्रप्रेनर्स में नहीं जाएंगे।

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