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'शबनम को तब तक लटकाएं, जब तक मर न जाए'

Sat, 23 May 2015 02:28 AM IST
Updated Sat, 23 May 2015 02:28 AM IST
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death warrant of shabnam in bawan kheri murder case

‘...इस अदालत ने 15 जुलाई 2010 को सिद्ध दोष बंदी शबनम और सलीम को फांसी की सजा से दंडित का आदेश दिया था। हाईकोर्ट इस दंडादेश की पुष्टि कर चुका है..... इनकी क्रिमिनल याचिका अपीलें निरस्त करके मृत्यु दंड की पुष्टि की जाती है.... इसके लिए आपको प्राधिकृत किया जाता है और आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप यथाशीघ्र शबनम और सलीम को गर्दन से लटकवाकर मृत्यु दंडादेश का अनुपालन कराएं... दोनों को गर्दन से तब तक लटकाया जाए जब तक इनकी मौत न हो जाए।

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बावनखेड़ी कांड में यह डेथ वारंट गुरुवार को अमरोहा के जिला जज अशोक कुमार पाठक ने जारी किया। डेथ वारंट में खूनी जोड़े को यथाशीघ्र फांसी पर लटकाने के लिए सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट को अधिकृत किया गया है। शबनम का डेथ वारंट गुरुवार को देर शाम जिला जेल पहुंच गया जबकि सलीम का डेथ वारंट आगरा सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट को जारी किया गया है।
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अमरोहा जिले के हसनपुर कस्बे से सटे छोटे से गांव बावनखेड़ी में 14/15 अप्रैल 2008 की रात को नरसंहार को अंजाम देने वाला खूनी जोड़ा फांसी के फंदे के एकदम करीब पहुंच गया है। शिक्षामित्र शबनम ने उस रात अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, भतीजे अर्श और फुफेरी बहन राबिया की गर्दनें कुल्हाड़ी से काटकर सात लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी।

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आगरा जेल भेजा गया सलीम का डेथ वारंट

death warrant of shabnam in bawan kheri murder case

15 जुलाई 2010 को अमरोहा के तत्कालीन जिला जज एए हुसैनी ने शबनम और सलीम को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस सजा को कनफर्म किया। खूनी जोड़े ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने भी फांसी की सजा बरकरार रखी है। सुप्रीम कोर्ट का फांसी बरकरार रखने का आदेश मिलने के बाद गुरुवार को अमरोहा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके पाठक ने इस खूनी जोड़े का डेथ वारंट जारी कर दिया।

सलीम आगरा केंद्रीय जेल में बंद है लिहाजा उसका वारंट आगरा भेजा गया है। शबनम का डेथ वारंट देर शाम जिला जेल पहुंचा। इसमें शबनम को यथाशीघ्र गर्दन से लटकवाकर मृत्यु आदेश का निष्पादन कराने के आदेश सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट को दिए गए हैं। वारंट में 15 मई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सजा बरकरार रखने के आदेश का हवाला देते हुए शबनम व सलीम को गर्दन से लटकवाकर दंडादेश का निष्पादन करने के आदेश दिए गए हैं।

जिला जज ने जेल सुपरिंटेंडेंट को दिए आदेश में कहा है कि 15 जुलाई 2010 को मृत्यु दंडादेश सुनाए जाने के बाद इस अदालत द्वारा इन बंदियों को आपकी अभिरक्षा में दिया गया था। राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास भी इनकी कोई दया याचिका लंबित नहीं है। लिहाजा यथाशीघ्र इन्हें फांसी पर लटका दिया जाए।

डेथ वारंट तामील करते वक्त फफक पड़ी शबनम

death warrant of shabnam in bawan kheri murder case

गुरुवार को रात के करीब पौने आठ बजे थे। शबनम का डेथ वारंट मिलने के बाद जेल अधिकारियों ने महिला बैरक का रुख किया। शबनम को बुलाया गया। धीरे से जेलर ने उसकी तरफ एक कागज बढ़ाकर उस पर दस्तखत करने को कहा।

अभी तक माहौल शांत था। लेकिन जैसे-जैसे शबनम इस कागज पर छपे अक्षरों को पढ़ती गई उसके चेहरे पर मौत का खौफ तारी होता गया। फिर आखिरी लाइन पढ़ते-पढ़ते उसकी आंखों से आंसु बहने लगे और वो जोर से चीखने के अंदाज में बिलखने लगी। इस आखिरी लाइन में जज ने लिखा था, सिद्ध दोष बंदी शबनम को तब तक गर्दन से लटकवाएं जब तक उसकी मौत न हो जाए... इस आदेश का अनुपालन यथाशीघ्र कराएं।

डेथ वारंट पहुंचने के बाद शबनम ने खाना नहीं खाया। हालांकि जेल अधिकारियों ने उसे समझाया कि अभी उसकी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है। उसके पास दया याचिका और रिवीजन का विकल्प अभी बाकी है। लेकिन वारंट पर लिखे यथाशीघ्र शब्द को लेकर शबनम डरी हुई थी।

जज ने आदेश में जेल सुपरिंटेंडेंट को यह अधिकार दिया है कि वह यथाशीघ्र व्यवस्था करके शबनम को फांसी पर लटका दें। महिला बंदियों ने शबनम को समझाया लेकिन बेटे ताज मोहम्मद को गोद में लेकर शबनम देर रात तक बिलखती रही। जेल अधिकारियों ने उसकी निगरानी के लिए अतिरिक्त महिला बंदी रक्षकों की ड्यूटी लगाई है। सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट ने शबनम का डेथ वारंट मिलने की पुष्टि की है।

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