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रोंगटे खड़े कर देगा नरपिशाच का ये सच

Fri, 26 Sep 2014 07:26 PM IST
Updated Fri, 26 Sep 2014 07:26 PM IST
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Chhattisgarh - Death Penalty for Child Slaughtered in Name of Sacrifice

छत्तीसगढ़ की दुर्ग ज़िला अदालत ने मनीषा नामक बच्ची की बलि के आरोपी चार लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई है।

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इन चारों लोगों को इसी साल 27 मार्च को एक लड़के चिराग की बलि के मामले में पहले ही सज़ा सुनाई जा चुकी है। चिराग के मामले में कुल 7 लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी।

गुरुवार को ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश गौतम चौरड़िया ने चार लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई, जिसमें तांत्रिक ईश्वर यादव, उसकी पत्नी किरण यादव, महानंद, और राजेन्द्र महरा शामिल हैं।
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सीजीखबर के अऩुसार आरोप है कि इन लोगों ने कसारीडीह साईं मंदिर के पास से 6 साल की मनीषा देवार का अपहरण किया और फिर उसे पांच दिनों तक अपने साथ रखा। इन आरोपियों का कहना था कि इन्हें सपना आया था कि अगर वे किसी बच्ची की बलि चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।
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इसके बाद इन सभी ने एकमत हो कर 6 साल की मनीषा की 4 मार्च 2010 को बलि दे दी थी। आरोपियों का राज नवंबर में खुला, जब उन्हें एक और बच्चे चिराग का अपहरण करके उसकी भी बलि दे दी थी।

चिराग की बलि

Chhattisgarh - Death Penalty for Child Slaughtered in Name of Sacrifice

पोषण राजपूत और दुर्गा राजपूत का डेढ़ साल का बेटा चिराग 23 नवंबर 2010 की दोपहर को लापता हो गया था।

राजपूत दंपत्ति ने मोहल्ले वालों के साथ लापता बच्चे की तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। इसके बाद वे मोहल्ले में ही रहने वाले तांत्रिक ईश्वरी यादव के घर पहुंचे, जहां तेज़ स्वर में गाना-बजाना हो रहा था।

मोहल्ले के लोगों ने पाया कि ईश्वरी तंत्र साधना में जुटा हुआ था और उसके सामने ही एक लोटे में ख़ून भरा हुआ था। ईश्वरी के साथ उसकी पत्नी और बच्चों के अलावा कुछ दूसरे शिष्य भी मौके पर उपस्थित थे।

मोहल्ले के लोगों ने जब ईश्वरी यादव पर दबाव बनाया तो उसने स्वीकार किया कि उसने अपनी कथित तंत्र शक्ति को बढ़ाने और उन्हें अपने बच्चों को भी हस्तांतरित करने के लिए डेढ़ साल के चिराग की जीभ और गला काट कर अपने देवता को बलि दे दी है।

मामले का खुलासा और सजा

Chhattisgarh - Death Penalty for Child Slaughtered in Name of Sacrifice

इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। बाद में वहीं पास से ही ज़मीन को खोद कर दो हिस्सों में बंटे हुए मासूम चिराग के शव को बरामद किया गया।

चिराग की बलि के मामले में पूछताछ के दौरान ही छह साल की मासूम मनीषा देवार की मार्च महीने में दी गई बलि का राज सामने आया था।

चिराग के मामले में सुनवाई करते हुये ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश गौतम चौरड़िया ने 7 लोगों को 27 मार्च को फांसी की सज़ा सुनाई थी। 25 सितंबर को मनीषा देवार के मामले में भी इन सात में से 4 लोगों को दोषी करार देते हुये फिर से फांसी की सज़ा सुनाई गई।

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