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लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस-मुलायम में हुई डील

Wed, 18 Dec 2013 12:04 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Wed, 18 Dec 2013 12:04 AM IST
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Deal between mulayam singh and congress ?for 2014

सपा के कई सांसद कहते हैं कि नेता जी जैसे ही सोनिया गांधी के सामने जाते हैं तो उनके सारे गिले शिकवे एकदम से दूर हो जाते हैं।

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भले ही ये मजाक हो मगर यूपीए सरकार के पिछले दस सालों के कार्यकाल में ऐसा कई बार हुआ है, जब बड़ी मुश्किलों में कांग्रेस को तगड़ा झटका देने के बाद नेता जी अंत में सोनिया गांधी से मुलाकात में मान गए।

मंगलवार को भी राज्यसभा में लोकपाल की राह में बाधा बनने के लिए सपा के गरम तेवर ठंडे पड़ गए। यह सब मुलायम की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ही हुआ।
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लोकपाल बिल पास कराने के लिए सरकार को रास्ता देने को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच बनी आपसी समझ 2014 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मानी जा रही है।

कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर चर्चा है कि नरेंद्र मोदी के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए मुलायम सिंह से सहयोग की संभावना को कांग्रेस ने बरकरार रखा है।

इसीलिए किसी भी तरीके से भाजपा को राजनीतिक बढ़त नहीं मिलने की बात मुलायम को याद दिलाते हुए प्रधानमंत्री और सोनिया ने लोकपाल पर समर्थन देने का आश्वासन मांगा।
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सूत्रों का कहना है कि मुलायम के सामने यही तर्क दिया गया कि लोकपाल बिल पास नहीं होने के चलते भाजपा की स्थिति मजबूत होगी, जबकि मोदी को कांग्रेस और सपा पर राजनीतिक हमला करने का बड़ा मौका मिल जाएगा।

शायद मुलायम भी कांग्रेस से भी इसी तरह की उम्मीद कर रहे थे। इसीलिए उन्होंने भी तुरंत अपने तेवर ढीले करते हुए राज्यसभा में बिल के रास्ते नहीं आने का निर्णय कर लिया। इससे पहले भी भाजपा को रोकने के लिए सपा ने कांग्रेस का बखूबी साथ निभाया है।

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तो सपा मुखिया ममता बनर्जी के साथ बैठकर कांग्रेस के खिलाफ एकदम बगावत ही कर बैठे थे। मगर उस समय भी सोनिया गांधी से उनकी गुपचुप मुलाकात ही रंग लाई और एक दिन बाद ही नेताजी ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर दिया।

मंगलवार को कांग्रेस के मैनेजर आखिरी समय तक मुलायम सिंह को मनाने की कोशिश में जुटे रहे। तमाम मान मनोव्वल के बाद आखिरी दांव के तौर पर पीएम और सोनिया की सपा मुखिया के साथ बैठक करवाई गई।


अब कांग्रेस लोकसभा में भी विधेयक को पास कराने के लिए सपा के ढीले तेवरों को बरकरार करने की कोशिश में है। वहीं सपा के उच्च पदस्थ सूत्र कह रहे है कि लोकपाल बिल में कही बातों पर पार्टी का विरोध है। उसे अपना विरोध जाहिर करना था, जो उसने वाकआउट करके जाहिर कर दिया है।

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