सुषमा-वसुंधरा पर कांग्रेस-बीजेपी में डील, दोनों का इनकार
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर चौतरफा घिरी भाजपा के सामने अब 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में अहम बिलों को पास कराने की बड़ी चुनौती है।
इस बीच टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से खबर है कि अप्रैल 2016 में केंद्र की ओर से प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल को लेकर कांग्रेस ने भाजपा के सामने एक शर्त रखी है।
इस शर्त के बदले कांग्रेस ने मानसून सत्र में राज्यसभा में जीएसटी बिल पास कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि मामला सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने ऐसी किसी भी शर्त या डील की बात से इंकार किया है।
आखिर क्या है वो शर्त?
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने भाजपा के सामने शर्त रखी है कि अगर वह ललित मोदी की मदद करने के मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री को उनके पद से हटाए तो बदले में कांग्रेस राज्यसभा में जीएसटी बिल का समर्थन करेगी। इस खबर के आने के बाद जब भाजपा और नेताओं से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ऐसी किसी भी शर्त से इंकार किया।
भाजपा सूत्रों ने कहा कि आगामी मानसून सत्र के लिए कांग्रेस से किसी भी डील का कोई सवाल ही नहीं उठता है। फिर चाहे वो जीएसटी बिल हो या भूमि अधिग्रहण बिल, हम हर मुद्दे पर संसद में बहस के लिए तैयार हैं।
वहीं कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने कहा कि भाजपा के सामने शर्त रखने की यह रिपोर्ट बिल्कुल तथ्यहीन है। हम संसद मे सरकार के साथ किसी भी मुद्दे पर कोई भी डील करने में विश्वास नहीं रखते।
जीएसटी बिल में पांच बदलाव के लिए दबाव डालेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने अप्रैल 2016 में केंद्र की ओर से प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल में पांच बदलाव करने के लिए दबाव बनाने का निर्णय किया है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पार्टी तंबाकू और बिजली को जीएसटी में शामिल करवाना चाहती है, जिन्हें अभी तक छूट मिली हुई है। पार्टी वस्तुओं का उत्पादन करने वाले राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए जीएसटी के अतिरिक्त एक प्रतिशत टैक्स को भी हटवाना चाहती है।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि यदि यह प्रावधान लागू होता है तो अन्य राज्यों की तुलना में सिर्फ गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को अधिक फायदा मिलेगा। पार्टी चाहती है कि बिल में निश्चित क्षतिपूर्ति फार्मूले का जिक्र होना चाहिए। कांग्रेस ने यूपीए सरकार की ओर से पेश किए गए बिल में मौजूद विवाद के निबटारे के प्रावधान को फिर से बहाल करने का दबाव बनाएगी। पार्टी चाहती है कि एक्ट में जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से अधिक न हो।