फोन करके बोला 'मुर्दा', जिंदा हूं मैं
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घर में बेटे की मौत के मातम का माहौल छाया हुआ था कि तभी उसके दोस्त के पास एक ऐसा फोन आया जिसकी वजह से पूरे घर में शान्ति और खुशी की लहर आ गई। दरअसल, पूरा घर जिस शव को अपना बेटा अनिल समझ कर मातम मना रहा था, वह उनका बेटा नहीं था।
अनिल के दोस्त सुरेश के पास वारंगल से उसका फोन आया और उसने बताया कि वह घर आ रहा है। इसकी खबर से पहले तो सभी चौंक गए, लेकिन फिर सभी में एक खुशी की लहर दौड़ गई। पोला लक्ष्मीनारायणन और लक्ष्मी ने बीते मंगलवार को मात्तेवाड़ा पुलिस स्टेशन में अपने 25 वर्षीय बेटे पोला अनिल की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी।
अन्तिम विदाई के लिए सैकड़ों लोग हो गए थे जमा
रिपोर्ट लिखवाने के कुछ समय बाद पुलिस ने उन्हें एक अस्पताल के मुर्दाघर में बुलाया और एक शव की पहचान करवाई। अनिल के माता पिता ने उस शव की पहचान अपने बेटे अनिल के रूप में की। शव की पहचान अनिल के रुप में किए जाने के बाद पुलिस ने शव को माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।
बेटे की मौत हो जाने की वजह से लक्ष्मीनारायणन के घर में मातम का माहौल छा गया। अनिल को अन्तिम विदाई देने के लिए येलम्मा बाजार में स्थित उनके घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस के अनुसार अनिल की मौत एक ट्रेन एक्सिडेंट में हुई थी।
ऐसे आया कहानी में ट्विस्ट
जब अनिल का दोस्त उसके अन्तिम संस्कार में जाने के लिए घर से निकलने ही वाला था, तभी उसके पास एक फोन आया। फोन पर अनिल की आवाज सुनकर उसका दोस्त सुरेश पहले तो चौंक गया, लेकिन फिर खुश हुआ। अनिल ने बताया कि उसने किसी निजी कारण से घर छोड़ दिया था।
अनिल ने बताया कि अभी वह वारंगल में है और घर वापस आ रहा है। सुरेश ने बिना देरी किए अनिल के घरवालों को इसकी सूचना दी, जिसने घर में छाए मातम के माहौल को शान्त कर दिया। उसके माता पिता ने जिस शव की पहचान की थी, वह अनिल का नहीं था। इसके बाद उन्होंने वह शव वापस पुलिस के हवाले कर दिया।