यूपीए सरकार के मंत्री की जमानत रद्द, तीन दिन में करना होगा सरेंडर
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन की अंतरिम जमानत को खारिज कर दिया। उन पर मंत्री रहते हुए अपने घर पर अवैध तरीके से टेलिफोन लाइन्स लगाने का आरोप है।
जस्टिस एस वैद्यनाथन ने सीबीआई की याचिका को मंजूर करते हुए मारन की जमानत को खारिज करते हुए उन्हें तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद मारन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इससे पहले 30 जून को जस्टिस आर सुब्बियाह ने मारन को दिल्ली के सीबीआई अदालत में पेश होने के ठीक एक दिन पहले छह महीने की सशर्त अंतरिम जमानत दी थी। मारक को एक से तीन जुलाई तक सीबीआई के सामने पेश होना था।
कलानिधि सन टीवी के मालिक हैं
सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा कि मारन जांच एजेंसी के साथ जांच में सहयोग नहीं कर रहे। इसके अलावा जांच के दौरान उनके बयानों में लगातार असंगति पाई गई।
मारन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अपने घर पर 300 टेलिफोन लाइनों के कनेक्शन लगवा रखे थे जिनका सन टीवी द्वारा व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। इससे बीएसएनएल को करोड़ो रुपये का नुकसान हुआ था।
गौरतलब है कि सन टीवी का मालिकाना हक कलानिधी मारन के पास है जो दयानिधि मारन के भाई हैं।