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दैत्य नाशिनी दुर्गा का अवतार है बेटी

Sat, 18 Jan 2014 06:01 PM IST
अमर उजाला, ललितपुर
अमर उजाला, ललितपुर Updated Sat, 18 Jan 2014 06:01 PM IST
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Daughter is the basis of society

बेटी के बगैर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। सच पूछिए तो बेटी समाज का आधार है। मां के रूप में ममता और दुलार है बेटी, राखी के बंधन का आधार है बेटी, पत्नी के रूप में घर संसार है बेटी, यही नहीं, दैत्य नाशिनी दुर्गा का अवतार है बेटी।

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इसके बाद भी अनपढ़ तो छोडि़ए सभ्य व पढ़े लिखे समाज के लोग बेटी को बोझ समझते हैं। लेकिन, अब इस सोच को बदलना होगा। इसके बगैर संपूर्ण समाज की स्थापना नहीं हो सकती है।
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यह संदेश रविवार को अमर उजाला के बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत जनपद के नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से रंगकर्मियों ने दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने बेटी को बचाने की शपथ ली और शपथ पत्र भी भरे।
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बिरधा ब्लाक स्थित किसान भवन में सैकड़ों लोगों के बीच कलाकारों ने नाटक के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हर किसी को बेटे की लालसा रहती है। बेटी के जन्म लेते ही लोग खुद को बोझ तले महसूस करने लगते हैं।

कुछ लोग तो गर्भ में ही बेटियों की हत्या कर देते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। बेटियां किसी भी मायने में बेटों से पीछे नहीं हैं। सच पूछिए तो तमाम बेटियां घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ- साथ सरकारी नौकरी व कारोबार भी संभाल रही हैं। वहीं पुरुष ऐसा नहीं कर सकता है।

झांसी की रानी ने तो आजादी की ऐसी ज्योति जलायी कि अंगे्रजों को देश छोड़कर जाना पड़ा। समाज में असहाय समझी जाने वाली बेटियां सेना में शस्त्र उठाकर देश की सेवा में लगी हुई हैं। बावजूद इसके लोग बेटियों को बेटों से कमतर देखते हैं।

लेकिन अब इस सोच को हर हाल में बदलना होगा। मां, पत्नी व बहन के रूप में सुख देने वाली बेटी को बेटी के रूप में मुस्कुराकर स्वीकार करना होगा। यहां कलाकारों ने लोगों को बेटी बचाने की शपथ दिलाई और लोगों ने शपथ पत्र भरकर बेटी बचाने का संकल्प भी लिया।

इसके बाद नाट्य कलाकारों ने घंटाघर, बस स्टैंड व तालाबपुरा में नुक्कड नाटक प्रस्तुत करके लोगों को बेटी बचाने का संकल्प दिलाया। उक्त स्थानों पर भी लोगों को बेटा और बेटी में फर्क नहीं करने का संदेश दिया गया। साथ ही बेटी बचाने की शपथ दिलाई गई।


खास बात यह रही कि हर स्थान पर लोगों ने अमर उजाला की इस पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और बढ़ - चढ़कर भागीदारी निभाई। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने शपथ पत्र भरे। कलाकारों में देवदत्त बुधौलिया, शरद नामदेव, मुबीन आरिफ, ब्रह्मदीन बंधु, सुनील परिहार, आशीष उर्फ मोंटी आदि मौजूद रहे।

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