मां मैं बेटी थी... या कोई मजबूरी...?
मां मुझे इस तरह क्यों फेंक दिया...इसलिए कि मैं बेटी थी या कोई मजबूरी। किसी मां के हाथ तो अपने कलेजे के टुकड़े को फेंकने के लिए नहीं उठ सकते तो आपने ऐसा क्यों किया? अगर मुझे फेंकना ही था तो नौ महीने कोख में क्यों पाला? वो कष्ट क्यों सहे? क्या मुझे फेंकते हुए आपके हाथ नहीं कांपे।
जब ये कुत्ते मेरी रूह को नोंच रहे थे तो क्या आपका कलेजा छलनी नहीं हुआ। ऐसी क्या मजबूरी थी जो आप मुझे अपना न सकीं। क्या ये समाज की बेड़ियां ममता से ज्यादा मजबूत हो गईं?
आपने मेरे नन्हे मन की आवाज तक नहीं सुनी। मुझे यूं ही मौत की गोद में फेंक दिया। ये सवाल उस नन्ही परी के हैं, जो इस ह्दय विहीन समाज में पैदा तो हुई, लेकिन चंद घंटों में ही दुनिया से चली गई।
पुलिस को मिली सूचना नवजात को नोच रहे थे कुत्ते
गंगानगर डी ब्लॉक स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने बीएसएनएल कॉलोनी है। मंगलवार दोपहर ग्यारह बजे किसी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि किसी नवजात शिशु को कुत्ते नोंच रहे हैं। सूचना के दस मिनट बाद ही गंगानगर पुलिस के सिपाही अजय, संजय, होमगार्ड पवन मौके पर पहुंचे।
कॉलोनी के गेट पर मौजूद गार्ड ने बताया कि कुछ कुत्ते नवजात बच्चे के शव को मुंह में दबाकर ले जा रहे थे। उसने शव को कुत्तों से छुड़ाकर गत्ते के डिब्बे में रख दिया। पुलिस ने डिब्बे के ऊपर से कपड़ा हटाकर देखा तो नवजात शिशु का शव रखा था, जो खून से लथपथ था।
गर्दन से पेट तक का हिस्सा कुत्तों ने नोंचकर अपना निवाला बना लिया था। पुलिस शव को एक निजी अस्पताल ले गई। वहां मौजूद डा. राजीव ने बताया कि यह शव नजवात कन्या है और आठ-दस घंटे पहले ही इसने जन्म लिया होगा।
सूचना पर अजित चौधरी, संजीव शर्मा, सहदेव ढाका, कृष्णा ढाका विनोद गौड़, अजीत भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने नवजात के शव का पोस्टमार्टम न करने के बजाए दफनाने की बात कही। गंगानगर चौकी इंचार्ज तेजवीर सिंह ने आठ लोगों की मौजूदगी में शव सौंप दिया। पुलिस और सामाजिक लोगों ने एल ब्लॉक स्थित श्मशान घाट में शव दफना दिया।