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अब हिंदी में पढ़ें दारुल उलूम का इतिहास
देवबंद/ब्यूरो
Updated Mon, 03 Dec 2012 10:50 AM IST
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अब इंटरनेट से दूर रहने वाले लोग भी दारुल उलूम का संपूर्ण इतिहास पढ़ सकेंगे। संस्था के 150 वर्षों के इतिहास को हिंदी पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है। इसलामी विश्वविद्यालय दारुल उलूम को नजदीक से जानने वालों के लिए इससे पूर्व में विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर संस्था का पूरा इतिहास हिंदी में डाला था।
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दारुल उलूम के इतिहास के बारे में जिज्ञासा रखने वाले लोग अब आसानी से संस्था के हर छोटे बड़े पहलू को करीब से जान सकेंगे। अब दारुल उलूम ने 150 वर्ष के इतिहास को किताब की शक्ल दी है। पुस्तक में संकलन का कार्य करने वाले इंटरनेट विभाग के प्रभारी मुफ्ती मोहम्मदुल्ला ने बताया कि मोहतमिम (कुलपति) मौलाना अबुल कासिम नौमानी बनारसी की अनुमति मिलने के बाद पुस्तक दारुल उलूम देवबंद का इतिहास को प्रकाशित किया गया है।
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पुस्तक का सरल हिंदी अनुवाद प्रोफेसर सुलेमान ने किया है। 325 पेज की पुस्तक में पृष्ठभूमि और स्थापना, दारुल उलूम देवबंद के 150 साल, विचारधारा और मौलिक सिद्धांत, दारुल उलूम की व्यवस्था और प्रबंधन, शिक्षा और पाठ्यक्रम, दारुल उलूम प्रसिद्ध व्यक्तियों की नजर में, महान उलेमा और विद्वान, संस्था के मोहतमिम, सदर मुदर्रिस और शेखुल हदीस की जानकारी विस्तार पूर्वक दी गई है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही इस इतिहास को उर्दू, अंग्रेजी और अरबी में प्रकाशित किया जाएगा।
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