EXCLUSIVE: पढ़िए, कितना खतरनाक है सलीम पतला
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बिजनौर से फरार आतंकियों की सलीम पतला से कई बार बात हुई थी। सूत्रों की मानें तो यहां तक कि आतंकी जिस चोरी की बाइक से फरार हुए थे, वह भी सलीम ने ही चोरी कराकर उन्हें बिजनौर में पहुंचाई थी। लेकिन धमाके के बाद आतंकी अपना काफी सामान मौके पर ही छोड़ गए थे। उसमें सिमकार्ड और मुरादाबाद-बिजनौर के बस टिकट भी मिले थे। इन्हीं के जरिए खुफिया टीमों और एटीएस ने सालों से मुरादाबाद में रह रहे आतंकी सलीम पतला को गिरफ्तार किया। अब सलीम के उन साथियों और दूसरे स्लीपिंग माड्यूल्स की तलाश की जा रही है, जिन्होंने सलीम को यहां बसाने में मदद की।
सलीम काफी शातिर है, उसके नापाक मंसूबों को खुद उसके आस पड़ोस के लोग भी नहीं जान सके। वह ऐसे रह रहा था, मानो एक व्यापारी अपने परिवार के साथ रहता हो। लेकिन अंदर ही अंदर वह दूसरे आतंकी संगठनों के संपर्क में था। बिजनौर के जाटान मोहल्ले में विस्फोट के बाद फरार हुए आतंकियों से भी उसकी कई बार फोन पर बात हुई थी। हालांकि खुफिया टीमें तो यह भी मान रही हैं कि वे आतंकी मुरादाबाद उसके घर पर भी आए और खुद सलीम भी बिजनौर उनसे मिलने जाता रहा। उसे अच्छी तरह से आतंकियों के मंसूबे पता हैं, लेकिन वह खुफिया टीमों को कुछ नहीं बता रहा। फरार आतंकियों से उसने किसी तरह का संबंध न होने की बात कही। जबकि कॉल डिटेल पूरी कहानी बयां कर रही है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक सलीम ने ही फरार आतंकियों को छिपाने में मदद की है। उसे वेस्ट यूपी में अपने जैसे कई स्लीपिंग माड्यूल्स के बारे में अच्छी जानकारी है। उसके जरिए कई और आतंकियों को पकड़ा जा सकता है। लिहाजा उससे पूछताछ जारी है। एटीएस उसके बेटों पर भी शिकंजा कस सकती है।
महीने भर से तलाश में जुटी थी टीमें
बिजनौर में धमाके के बाद जब खुफिया टीमें, एटीएस और एसटीएफ अलर्ट हुईं। उसे पक्का यकीन था कि आतंकियों का मुरादाबाद से खास रिश्ता है। इसीलिए छानबीन के सिलसिले में एटीएस एक माह में चार बार मुरादाबाद आई और यहां कई दिन तक रुकी। कोतवाली के होटलों से पूरा नेटवर्क आपरेट किया और शहर व देहात के कुछ गांवों में तलाश की। उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया गया, जिस पर आतंकियों की सलीम से बात हुई थी। लेकिन वह नंबर बंद मिला।
बीच-बीच में नंबर की लोकेशन कभी कटघर तो कभी मूंढापांडे दिखाई देती थी। लिहाजा एटीएस को पक्का यकीन था कि आतंकियों का मददगार सलीम कटघर व मूंढापांडे के बीच ही रहता है। लेकिन गुरुवार शाम टीम ने आखिरकार सलीम को पकड़ लिया। उसे मुरादाबाद से ले जाकर मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार दिखाया गया।
...लेकिन सोती रही मुरादाबाद पुलिस
स्लीपिंग माड्यूल्स चोरी छिपे मुरादाबाद में रह रहे हैं। वे चुपचाप अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन जिले के पुलिस व प्रशासनिक अफसर और इंटेलिजेंस टीमें शांत बैठी हैं। बिजनौर धमाके के बाद बरेली मंडल के जिलों में ही नहीं, आसपास के तमाम मंडलों में अलर्ट कर दिया गया। लेकिन मुरादाबाद पुलिस सोती रही। एलआईयू और खुफिया टीमें भी कुछ नहीं कर पाईं। 17 साल से सलीम पतला यहां अपने ही नाम से मकान बनवाकर रहता रहा, लेकिन पुलिस को भनक भी नहीं लगी। इसे पुलिस की लापरवाही और नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे। आतंकियों के बारे में सवाल पूछने पर अफसर यही बात कहते रहे कि वो तो बिजनौर का मामला है, हमारे जनपद में शांति है।
सलीम की दुकान से खरीदारी करते थे सिपाही
सलीम के घर से कटघर की काशीपुर तिराहा चौकी की दूरी 100 कदम से ज्यादा नहीं है। रोजाना पुलिसवालों का निकलना होता था। वे अपना फोन भी रीचार्ज कराते तो सलीम के बेटे की दुकान पर जाते थे। वहीं खानपान का कोई सामान लाना होता तो भी सलीम के बडे़ बेटे शाकिर की दुकान पर जाते थे। लेकिन इतना भी नहीं जान पाए कि वे एक आतंकी के बेटों के पास जा रहे हैं। यही नहीं, सलीम का भी काशीपुर तिराहा चौकी के सामने से रोजाना आना जाना होता था। चूंकि वह प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। इसलिए कभी कबार चौकी के अंदर भी जाता था।
आतंकियों के लिए नए ठिकाने की तलाश में था सलीम
इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े आतंकी सलीम पतला पर वेस्ट यूपी में स्लीपिंग मॉड्यूल्स को महफूज पनाहगाह मुहैया कराने का जिम्मा था। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगे के बाद ऑपरेशन बिजनौर में खलल पड़ने से बौखलाए आतंकियों के लिए वह नए ठिकाने की तलाश कर रहा था। नेटवर्क को फिर से स्थापित करने के लिए ही सलीम मुरादाबाद से मुजफ्फरनगर के खतौली पहुंचा और पकड़ा गया।
पुलिस अधिकारी सलीम से पूछताछ के दौरान सामने आए कई संगीन सवालों का जवाब तलाशने में जुटे हैं।
करीब 20 वर्षों से मुरादाबाद में रह रहे लिसाड़ी गेट मेरठ निवासी सलीम के हाथ वेस्ट यूपी में आतंकी गतिविधियों का रिमोट था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों जिस आतंकी एजाज सईद शेख को सहारनपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया था, वह आतंकी सलीम पतला से मिलने जा रहा था। दिल्ली पुलिस लगातार उसे ट्रैस कर रही थी। इस आतंकी से पूछताछ में सलीम पतला का नाम सामने आया तो एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) ने उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा दिया।
भावनाएं करता था कैश
खुफिया सूत्रों के अनुसार सलीम का मुख्य टास्क वेस्ट यूपी में स्लीपिंग मॉड्यूल्स को तैयार करना और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराना था। बताया जाता है कि मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगे के बाद सलीम युवाओं की भावनाओं को भड़काकर उन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की मुहिम में जुटा था। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सलीम कुछ आईएसआई एजेंटों के साथ राहत शिविरों में भी गया था। यह बात इंटेलीजेंस की जानकारी में आई तो सियासी हल्कों में भी हलचल मच गई थी।
पतला पर थी मोटी जिम्मेदारी:
सलीम पतला पर वेस्ट यूपी में स्लीपिंग मॉड्यूल्स को एक्टिवेट करने और बाहर से आए आतंकियों की मदद करने की अहम जिम्मेदारी थी। खुफिया सूत्रों की मानें तो बिजनौर के जाटान मोहल्ले में आतंकियों का खेल बिगड़ने से पूरा ऑपरेशन गड़बड़ा गया था। ऐसे में सलीम पतला और उसके साथियों ने ही इन आतंकियों के लिए सेफ जोन का इंतजाम किया था। यह भी चर्चा रही कि बिजनौर से भागकर ये आतंकी मुरादाबाद पहुंचे थे और ब्लास्ट में झुलसे आतंकी का इलाज मुरादाबाद के एक इलाके में हुआ था।
नाम पतला, काम बारीक:
सलीम पतला अपने काम को बड़ी बारीकी से अंजाम देता था। इसी के चलते वह 20 साल से गुमनाम रहकर नापाक मंसूबों को अंजाम देता रहा।