'बर्दवान ब्लास्ट' में हुआ बेहद खतरनाक खुलासा
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बर्दवान ब्लास्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को आरोपपत्र दायर करते हुए अहम खुलासा किया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कहा है कि बांग्लादेशी आतंकवादी यहां बने बमों की सहायता से बांग्लादेश सरकार का तख्ता पलट कर वहां शरीयत कानून के तहत सत्ता स्थापित करना चाहते थे।
एजेंसी ने मामले में चार बांग्लादेशियों सहित 21 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। एजेंसी ने अभियुक्तों पर आतंकी गतिविधि, षड्यंत्र रचने, भर्ती, आतंकी शिविर चलाने और फंडिंग करने, हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी, फर्जीवाड़ा, विदेशी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए ने इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। बीते साल दो अक्तूबर को बर्दवान के खागड़ागढ़ इलाके के एक मकान में हुए विस्फोट में दो लोग मारे गए थे।
एनआईए ने 21 के खिलाफ दायर की चार्जशीट
जांच के दौरान पता चला कि उस मकान में आधुनिक विस्फोट उपकरण (आईईडी) बनाए जा रहे थे और उनको बाद में तस्करी से बांग्लादेश भेज दिया जाता था।
एनआईए की जांच से इस बात का भी खुलासा हुआ कि आतंकवादी संगठन जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) ने बंगाल के मुर्शिदाबाद, नदिया, बीरभूम, मालदा और बर्दवान के अलावा असम के बरपेटा और झारखंड के पाकुड़ व साहिबगंज में अपना मजबूत नेटवर्क कायम कर लिया था।
जांच एजेंसी का दावा है कि जेएमबी के कई सदस्यों ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा और मुकिम नगर, बीरभूम के नानूर और बर्दवान के सिमुलिया और खागड़ागढ़ में अपने प्रशिक्षण शिविर स्थापित किए थे। उनमें से कई शिविरों में बम बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता था।