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गंगा-यमुना की मछली खाने से कैंसर का खतरा!

Wed, 31 Dec 2014 12:56 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, इलाहाबाद
अरविंद सिंह/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 31 Dec 2014 12:56 PM IST
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Eating fishes from Ganga and Yamuna can be Cancerous

इलाहाबाद और उसके आसपास के इलाकों में गंगा-यमुना में मिलने वाली रोहू, कतला, पेहना, चेल्वा और केवाई मछली खाने वाले सतर्क हो जाएं। ये मछलियां स्नायु विकार, चर्म रोग और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकती हैं। पिछले दिनों संगम तट पर मृत मिलीं मछलियों और इलाहाबाद में गंगा-यमुना के जल के परीक्षण के बाद सैम हिंगिनबाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी साइंस के वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इन मछलियों को खाना खतरनाक है।

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इलाहाबाद के नैनी स्थित सैम हिंगिनबाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी साइंस के बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक मिल्टन लाल के निर्देशन में विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने गंगा-यमुना के जल का परीक्षण करने के साथ ही संगम तट पर मरी मिलीं मछलियों का भी अध्ययन किया था। शोध टीम में शामिल बायोकेमेस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित अलेक्जेंडर चरन एवं शोध छात्र सैय्यद शोएब नौशाद सहित अन्य विज्ञानियों की टीम को जांच के दौरान गंगा जल में सीसा, कॉपर, कैडमियम, आयरन एवं निकेल जैसे भारी तत्व मिले। विज्ञानियों के मुताबिक, जल में इन भारी तत्वों की जितनी मात्रा पाई गई, वह बीआईएसडीडब्ल्यू (ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड फार ड्रिकिंग वाटर) के तय मानक से काफी अधिक है।
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विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई है कि दोनों नदियों में पाई जाने वाली रोहू, पेहना, चेल्वा और केवाई के शरीर में उक्त तत्वों की मात्रा अधिकता है। लंबे समय तक ऐसी मछलियों का सेवन करने वाले कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। इसके अलावा चर्म व स्नायु विकास से भी ग्रसित हो सकते हैं। मछलियों में खतरनाक तत्वों की अधिकता गंगा-यमुना के अन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
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मछलियों में सीसे की मात्रा खतरनाक स्तर पर

Eating fishes from Ganga and Yamuna can be Cancerous

वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके मिश्रा के अनुसार, शरीर में सीसे की मात्रा अधिक होने पर फेफड़े एवं पेट के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। गंगा-यमुना में पाई जाने वाली मछलियों में पानी के माध्यम से सीसा जैसा खतरनाक तत्व पहुंच रहा है तो यह इन मछलियों का सेवन करने वालों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

इविवि के विज्ञानियों को भी जांच में मिले खतरनाक तत्व

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर केएन उत्तम की अगुवाई में विशेषज्ञों की एक टीम ने गंगा जल का परीक्षण किया था। परीक्षण में गंगा जल में कैडमियम एवं सीसा जैसे खतरनाक तत्वों की मौजूदगी का पता चला था। इस शोध रिपोर्ट के मुताबिक गंगा को शीघ्र ही प्रदूषण मुक्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

नैनी स्थित सैम हिंगिन बॉटम इंस्टीट्यूट (शियाट्स) में बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक मिल्टन लाल ने कहा कि  गंगा-यमुना में कैडमियम, कॉपर, सीसा, निकेल जैसे तत्वों की अधिकता चौंकाने वाली है। मछलियों की जांच में इन तत्वों की अधिकता पाई गई है। ऐसे में गंगा-यमुना में पाई जाने वाली मछलियों के सेवन से कैंसर, न्यूरो संबंधी एवं चर्म रोग जैसी बीमारी हो सकती है।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज वरिष्ठ न्यूरो सर्जन एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसपीएस चौहान ने बताया कि शरीर में किसी भी माध्यम से सीसा, निकेल जैसे तत्व का जाना न्यूरो से जुड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है। कैडमियम भी शरीर में नहीं जाना चाहिए। इनकी अधिकता से शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है।

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