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आत्मकथा: डांस बार बंद होते ही उजड़ी दुनिया

Wed, 17 Jul 2013 01:23 AM IST
मुंबई/ब्यूरो
मुंबई/ब्यूरो Updated Wed, 17 Jul 2013 01:23 AM IST
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dancer's Autobiography

कोई बार डांसर अपना नाम सही नहीं बताना चाहती। पूछने वाला चाहे बार में आया ग्राहक हो या फिर मीडिया। पूजा (बदला हुआ नाम) भी ऐसा ही करती है।

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हालांकि वह कहती है कि बिंदास पूछो मैं बिंदास जवाब दू्ंगी। लेकिन बातों का सिलसिला शुरू होते ही उसकी आंखें नम हो जाती हैं। कहती है, ‘ऐसा लग रहा है जैसे आठ साल का अंधेरा अब खत्म हुआ है।’
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उम्र की ढलान की ओर बढ़ चुकी पूजा 1986-87 में नागपुर से मुंबई आई थी। एक समय मिल में काम करने वाली पूजा की जिंदगी ने तब कांटों भरा मोड़ ले लिया, जब मिलों पर ताला लग गया।
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तब पूजा ने बार में काम करने का फैसला किया। मगर बार डांस बंद होने के बाद पूजा के पति ने उसे छोड़ दिया। अपने दोनों बच्चों के नाम स्कूल से कटाने पडे़।

उसे अपना मकान और गहने तक बेचने पड़े। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से पूजा खुश है।

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