फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Dance in marriage, Ulema not read Nikah.

ढोल पर थिरके तो उलेमा ने नहीं पढ़ाया निकाह

Tue, 01 Dec 2015 04:18 AM IST
Updated Tue, 01 Dec 2015 04:18 AM IST
विज्ञापन
Dance in marriage, Ulema not read Nikah.

शादी समारोह में डांस, डीजे और शराब पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद इसका पालन न करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ उलेमा ने कड़ा रुख अपना लिया हैं।

विज्ञापन


रविवार को एक शादी में ढोल बजने और डांस होने पर उलेमा ने निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया। बाद में दूल्हे के परिजनों द्वारा गलती मानने पर देर रात 11 बजे निकाह पढ़ाया गया।
विज्ञापन


आठ नवंबर को मोहल्ला कस्साबन स्थित मस्जिद कुरैशियान में हुई बैठक में उलेमा ने शादी में डीजे, ढोल आदि बजाने, शराब पीने और पिलाने वालों के यहां निकाह नहीं पढ़ाने का ऐलान किया था। अन्य समारोहों में भी इन सब पर पाबंदी लगाई गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसकी सूचना देने के लिए हर मस्जिद क्षेत्र में दस लोगों की कमेटी भी बनाई गई थी। क्षेत्र के एक मोहल्ले के युवक की शादी रविवार को मोहल्ले की ही युवती से थी। शादी मोहल्ले से थोड़ी दूर एक बैंक्वेट हॉल में रखी गई थी।

शादी में डीजे, ढोल, डांस, शराब का उलेमा ने किया बहिष्कार

Dance in marriage, Ulema not read Nikah.

बारात में दूल्हे के दोस्तों ने तीन ढोल मंगवा लिए और जमकर डांस करते हुए बैंक्वेट हॉल पहुंचे। इसकी सूचना उलेमा को लग गई। शाम करीब सात बजे जब निकाह पढ़ने के लिए मौलाना निशाद कासमी को बुलाया गया तो उन्होंने निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया। इससे दूल्हा और दुल्हन पक्ष में हड़कंप मच गया।

सूचना पर चाहशीरी स्थित जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अनवारुल हक, मुफ्ती हिफ्जान, मौलाना खुर्रम, कारी मोहसिन, कारी अफसर आदि मौके पर पहुंच गए।

दूल्हे पक्ष के बुजुर्गों ने बताया कि दूल्हे के दोस्तों ने उनको पहले ही बैंक्वेट हॉल भेज दिया था। उनको नहीं पता था कि दूल्हे के दोस्त डांस कर रहे हैं। अगर पता होता तो वे उनको पहले ही रोक देते। मान मनव्वल के बाद देर रात करीब 11 बजे निकाह पढ़ाया गया।

उधर, रविवार को ही नई बस्ती निवासी एक युवक की बारात कोटद्वार गई थी। उसके मोहल्ले में बारात चढ़ाई थी। इसका पता चलने पर उलेमा ने कोटद्वार में फोन कर दूल्हे का निकाह घंटों तक नहीं पढ़ने दिया। मौलाना अनवारुल हक के मुताबिक इस्लाम में इन सभी चीजों की मनाही है। इसका पालन न करने वालों के खिलाफ उलेमा का अभियान जारी रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed