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दामिनी ने चमकाई रिक्शा चालक पिता की किस्मत

Thu, 25 Oct 2012 10:18 PM IST
जयपुर/एजेंसी
जयपुर/एजेंसी Updated Thu, 25 Oct 2012 10:18 PM IST
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Damini hurl his rickshaw driver father's fate

ऐसे समाज में जहां हर साल हजारों-लाखों बेटियां जन्म से पहले ही गर्भ में मार दी जा रही है, भरतपुर (राजस्थान) के 34 वर्षीय साइकिल रिक्शा चालक बबलू और उनकी दुधमुंही बेटी दामिनी की कहानी किताबों से निकली मालूम पड़ती है। जबकि यह हकीकत है। दामिनी के जन्म के कुछ ही घंटों बाद 20 सितंबर को उसकी मां स्वर्गवासी हो गई और दामिनी को भी देख कर लगता था कि वह नहीं बचेगी।

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गरीबी ने बबलू को बुरी तरह जकड़ रखा था और उसके पास खाने के पैसे तक नहीं थे। लेकिन उसके दिल में बेटी को बचाने की चाह थी और उसने हार नहीं मानी। खाने और इलाज के पैसे कमाने के वास्ते वह अपने कंधे पर झोली बांध उसमें अपनी नन्हीं परी को रख कर रिक्शे के साथ सड़क पर उतर पड़ा। धीरे-धीरे उस पर लोगों की नजर पड़ी और एक के बाद एक उसकी मदद को हाथ बढे़।
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नतीजा यह निकला कि दामिनी का इलाज हो सका और अब वेंटिलेटर के बगैर वह किलकारियां भर रही है। बेटी को बचाने की बबलू की चाह और संघर्ष का परिणाम है कि आज उनके पास नया रिक्शा है और राजस्थान सरकार तथा अनेक लोगों से मिले कुल 14 लाख रुपये उसके बैंक खाते में। दामिनी वार्कई बबलू के लिए ‘लक्ष्मी’ साबित हुई।
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बबलू बताते हैं, ‘एक बैंक ने मुझे नया रिक्शा और 10 हजार रुपये दिए। जिला कलेक्टर ने कहा कि दामिनी के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। हर तरफ से लोगों ने भी मेरी मदद की।’ वह अब बेटी को अच्छी शिक्षा और अच्छा जीवन देना चाहते है। कहते हैं, ‘मैं तो अंगूठाछाप हूं, लेकिन बेटी को अच्छे स्कूल मे पढ़ाऊंगा। जो लोग बेटियों को छोड़ देते हैं उन्हें अपनाने में हिचकते हैं मैं उनसे कहना चाहूंगा कि वे बोझ नहीं हैं, भगवान का आशीर्वाद हैं।’

डॉक्टरों के अनुसार जन्म के समय दामिनी का वजन बेहद कम था और उसके शरीर में रक्त की कमी थी। उसका बचना मुश्किल लग रहा था। बुधवार को उसे वेंटिलेटर से हटाया गया है और उसकी हालत से डॉक्टर प्रसन्न हैं। बबलू बताते हैं, ‘जब वह पैदा हुई थी तब मेरे पास कुछ नहीं था। न खाने का पैसा न इलाज का। मैं भीख मांग सकता था या किसी के आगे हाथ फैला सकता था, लेकिन मेरी आत्मा नहीं मानी। तब मैंने फैसला किया कि उसे अपने साथ झोली में रखूंगा और रिक्शा चलाऊंगा।’


भरतपुर के जिला कलेक्टर ज्ञान प्रकाश शुक्ला कहते हैं कि देश में जो लोग लड़कियों से भेदभाव करते हैं, उन्हें बबलू को आदर्श मानना चाहिए। उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने लाख मुश्किलें उठा कर भी अपनी बेटी को बचाने का फैसला किया और जद्दोजहद की। बबलू कहते हैं, ‘दामिना का पिता तो मैं हूं ही, अब उसकी मां भी मैं ही बनूंगा।’

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