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POK में डैम बनाने में अमेरिकी मदद से भारत नाखुश

Sat, 24 Oct 2015 10:33 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 24 Oct 2015 10:33 PM IST
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'Dam construction in POK is not acceptable to India'

पाकिस्तान और अमेरिका की बढ़ती करीबी और खासतौर पर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में डैम निर्माण के लिए पाकिस्तान को अमेरिका से मिले सहयोग के आश्वासन से भारत नाखुश है।

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अपनी नाखुशी का खुलकर इजहार करते हुए भारत ने शुक्रवार को कहा कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है। इसलिए इस क्षेत्र के लिए किसी भी देश से होने वाला समझौता भारत को मान्य नहीं है।
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अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हथियार सौदे पर भी भारत की निगाहें टिकी हैं। भारत ने कहा है कि हथियार सौदे को अभी कई स्तरों पर मंजूरी मिलनी बाकी है। उम्मीद है कि कांग्रेस में पाकिस्तान को जानने समझने वाले सौदे को मंजूरी देने से पहले गहन विचार विमर्श करेंगे। इस बीच भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का पाकिस्तान का अमेरिका के समक्ष किए गए वादे पर भी कूटनीतिक लाइन ली है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने आतंकवाद पर कई बार पाकिस्तान के वादे पढ़े हैं। उम्मीद है कि पाकिस्तान अमेरिका से किया वादा निभाएगा।

भारत एनएसए स्तर की वार्ता के लिए तैयार

'Dam construction in POK is not acceptable to India'

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त घोषणा पत्र में पाकिस्तान ने अपने यहां हक्कानी ग्रुप और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने संयुक्त घोषणा पत्र में भारत-पाकिस्तान को कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत की सलाह के संबंध में कहा कि भारत हमेशा से सभी विवादास्पद मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने का पक्षधर है।

भारत अब भी ऊफा में बनी सहमति के आधार पर एनएसए स्तर की वार्ता के लिए तैयार है। मगर मुश्किल यह है कि आतंकवाद को प्रश्रय देना पाकिस्तान सरकार की नीति में शामिल है।

स्वरूप ने कहा कि संयुक्त घोषणा पत्र में पाकिस्तान ने हक्कानी ग्रुप और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। उम्मीद है कि पाकिस्तान अपना वादा निभाएगा।

दोनों देशों के बीच हुए हथियार सौदे पर उन्होंने कहा कि यह एक लंबी प्रक्रिया है। खासतौर पर अमेरिकी कांग्रेस में कई प्रतिनिधि पाकिस्तान की स्थिति से वाकिफ हैं। उम्मीद है कि इसे अंतिम मंजूरी देने से पहले सभी पहलुओं पर गंभीर विचार विमर्श होगा।

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