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दलितों पर अत्याचार के खिलाफ कानून होगा सख्त

Thu, 26 Jun 2014 07:45 AM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 07:45 AM IST
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Dalits have strict laws against torture

दलितों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ कानून को ज्यादा सख्त बनाने के लिए मोदी सरकार आगामी बजट सत्र में नया विधेयक ला सकती है। इस साल 4 मार्च को लागू अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अध्यादेश में रेप, हमला और अपहरण जैसे अपराधों को भी इसमें शामिल किया गया है।

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इन अपराधों में से अधिकतर में 10 साल से कम की सजा का प्रावधान है, लेकिन संशोधन के बाद इस तरह के अपराधों में 10 साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट, 1989 को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए धारा 3 में नए अपराधों को भी सूची में शामिल किया गया है।

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मजबूत होगा कानून

Dalits have strict laws against torture

सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल पर रोक, जादू टोने के आरोप, पूजा करने के स्थान में आने से रोकना, सामाजिक आर्थिक बहिष्कार और दुश्मनी को बढ़ावा देना जैसे अपराधों को भी एक्ट की सूची में डाला गया।

इन सभी अपराधों को अब एससी व एसटी लोगों के खिलाफ क्रूर व्यवहार माना जाएगा। इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत के गठन और पीड़ितों के पुनर्वास का प्रावधान भी संशोधित अध्यादेश में शामिल है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार आगामी बजट सत्र में इस विधेयक को लाने वाली है। यूपीए सरकार पिछली लोकसभा में इस बिल को लेकर आई थी, लेकिन यह पास नहीं हो गया। इसलिए उसे अध्यादेश लाना पड़ा। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि विधेयक में अध्यादेश के सभी प्रावधान होंगे या नहीं।

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