कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगा भारत, पीएम ने कहा ये हमारा 'पाप' नहीं
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इस साल दिसंबर में पेरिस में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले भारत ने अपनी तरफ से कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में बड़ी कटौती का लक्ष्य पेश किया है। इसके तहत भारत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में 35 फीसदी तक की कटौती करेगा।
साथ ही वह इस अवधि में ऊर्जा उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की भागीदारी 40 फीसदी करने की बात कही है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कवेंसन में भारत ने अपनी ओर से यह लक्ष्य तय किया है। भारत का यह लक्ष्य उसके वर्तमान कटौती लक्ष्य से 75 फीसदी अधिक है।
नई दिल्ली में इसकी घोषणा करते हुए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि वर्तमान कीमत के आधार पर भारत को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम से कम 25 खरब डॉलर की राशि की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अभी तक जलवायु परिवर्तन से लड़ने की भारत की कोशिश के लिए धन की व्यवस्था घरेलू संसाधनों से की जाती रही है, लेकिन अब ज्यादा संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।
वादे पर आधारित
महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर ‘इंटेंडेड नेशनली डिजरमाइंड
कंट्रीब्यूशन’ के बारे जावड़ेकर ने बताया कि हमारा यह लक्ष्य व्यापक,
महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की
तीव्रता घटाने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ भारत 2030 तक 2.5 से
तीन अरब टन कार्बन को सोखने के लिए अतिरिक्त पेड़ लगाकर जंगलों को बढ़ाएगा।
इससे पहले बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से पेश
‘इंटेंडेड नेशनली डिजरमाइंड कंट्रीब्यूशन’ पेश किया गया। कुल 38 पेज के इस
दस्तावेज में भारत ने प्रतिबद्धता को हासिल करने के लिए अपनी तरफ से ‘नेशनल
एडॉप्टेशन फंड’ की स्थापना की बात कही है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने
की उसकी यह दीर्घकालिक योजना कोपेनहेगन में वर्ष 2020 तक उत्सर्जन की
तीव्रता में 20-25 फीसदी की कटौती के वादे पर आधारित है। इसमें नीति आयोग
के अनुमान का जिक्र करते हुए यह भी कहा गया है कि सामान्य कार्बन उत्सर्जन
के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को 2030 तक 834 अरब डॉलर की जरूरत
पड़ेगी
ये हमारा पाप नहीं
इस साल के अंत में जलवायु परिवर्तन पर पेरिस में होने वाले महत्वपूर्ण सम्मेलन से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पर्यावरण संकट के ‘पाप’ में भारत की भूमिका नहीं हैं।
प्रधानमंत्री शुक्रवार को झारखंड के खूंटी में गांधी जयंती के अवसर पर 180 किलोवाट के सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। मोदी ने कहा, ‘मैं 125 करोड़ भारतीयों की ओर से दुनिया को बता देना चाहता हूं कि इस पाप में हमारी कोई भूमिका नहीं है जिससे यह पर्यावरण संकट उपजा है।’
उन्होंने कहा, ‘इसे ध्यान दिए बिना कि किसने यह पाप और गलती की है, भारत मानवता के कल्याण के लिए अपना योगदान देगा। इस अवसर पर मोदी ने महात्मा गांधी को अपनी प्रेरणा बताते हुए पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण की वकालत की।