जिस गाय के वध पर हुआ बवाल, वह जिंदा है
बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में धर्मस्थल के पास मांस पड़ा मिलने के बाद बवाल करने वाले जिस लाल गाय का वध होने की बात कह रहे थे, वह जिंदा है। धर्मस्थल के पास मिला मांस किसका है, इसका अभी तक पता नहीं चला है। पुलिस ने शुक्रवार को अदालत से अनुमति लेने के बाद मांस को परीक्षण के लिए एनिमल फोरेंसिक लैब मथुरा भेजा है।
बुधवार को धर्मस्थल के पास मांस मिलने के बाद लोगों ने एक लाल गाय का वध किए जाने की बात कहकर हंगामा किया था। भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि गाय कस्बे में कहीं दिखाई नहीं दे रही है। उसी का वध करके अवशेष धर्मस्थल के पास फेंका गया है। बुधवार को बवाल हो ही रहा था कि कुछ देर बाद लाल गाय रामलीला मैदान में चरने पहुंच गई थी। हालांकि पुलिस के मुकदमा लिखने के बाद भीड़ शांत हो गई थी। फिर यह चर्चा शुरू हुई कि मांस किसका था। पशु पालन विभाग के अपर निदेशक एनपीएस गहलौत ने बताया कि पांच डॉक्टरों की टीम मांस का सैंपल लाई थी। पुलिस ने कोर्ट की इजाजत मिलने के बाद सैंपल को परीक्षण के लिए मथुरा की एनिमल फोरेंसिक लैब भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग पाएगा कि मांस किसका था।
मुख्य आरोपियों पर रासुका लगेगी: आईजी
आईजी विजय सिंह मीना ने कहा कि फतेहगंज पश्चिमी की स्थिति सामान्य है। सुबह-सात बजे से आठ बजे तक फ्लैग मार्च कराया गया। साप्ताहिक बंदी की वजह से बाजार नहीं खुला। शनिवार से बाजार खुलेगा। हमें कुछ वीडियो फुटेज मिली हैं, उनके जरिए आरोपियों को चिह्नित किया जा रहा है। मुख्य आरोपियों पर रासुका लगाई जाएगी।
सद्दाम को पकड़ना तो आसान था
फतेहगंज पश्चिमी में धर्मस्थल के पास पशु के अवशेष फेंकने के मुख्य आरोपी सद्दाम को पकड़ना पुलिस के लिए आसान था। पशु तस्करी में पहले भी उसका नाम आता रहा है। कस्बे का माहौल गरम होने पर पुलिस ने उसे तीन साथियों के साथ पकड़ तो लिया लेकिन उसे मीडिया के सामने नहीं लाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा कि कि बुधवार की घटना के पीछे सद्दाम ही था या पुलिस ने माहौल शांत करने के लिए उसे अंदर किया।
मूल रूप से सीबीगंज इलाके के तिलियापुर गांव का रहने वाला सद्दाम कई साल से मांस का कारोबार करता है। कई साल से वह फतेहगंज पश्चिमी के मोहल्ला अंसारी में अपने मामा मुस्तकीम के घर के पास किराए का मकान लेकर रह रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक महीने पहले भी सद्दाम पर पशु चोरी और वध का आरोप लगा था। उसने रबर फैक्ट्री कॉलोनी के दो लड़कों को लालच देकर आवारा पशु को पकड़कर गायब कर दिया था। कॉलोनी के लोगों की शिकायत पर पुलिस ने उसके साथियों को पकड़ लिया था लेकिन उसे छोड़ दिया था। बुधवार की रात मोहल्ला माली में धर्मस्थल के पास मांस पड़ा होने पर बवाल हुआ तो एक होटल कर्मी समेत दो लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस का दावा है कि उन्होंने बताया कि सद्दाम ने मांस धर्मस्थल के पास डाला है।
इसके बाद पुलिस ने सद्दाम को आनन-फानन में पकड़ लिया। उसके साथी शकील अहमद पुत्र बन्ने, सादिक पुत्र अकील और नई बस्ती के मुस्तकीम पुत्र छोटे को भी पकड़ लिया गया। यह तो सच है कि वह पशुओं की चोरी में काफी समय से लिप्त है। पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद उसे चुपचाप जेल क्यों भेज दिया। यह सवाल अपनी जगह बना हुआ है।
सद्दाम उसके मामा मुस्तकीम, सादिक और वकील अहमद को पुलिस ने गौवध अधिनियम, धार्मिक भावनायें भड़काने के आरोप में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वतीय एके श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया। अदालत ने चारों आरोपियों को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया।
भाजपा ने खोला एसएसपी धर्मवीर के खिलाफ मोर्चा
कांठ प्रकरण के बाद भाजपा के निशाने पर आए एसएसपी धर्मवीर यादव के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोलते हुए फतेहगंज प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है, इसमें चार सांसद हैं। कमेटी अपनी रिपोर्ट दो दिन में प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी। रिपोर्ट को गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल राम नाईक को सौंप कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
कैंट विधायक और भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कमेटी में बागपत के डॉ. सत्यपाल सिंह, बुलंदशहर के सांसद डॉ. भोला सिंह, शाहजहांपुर की सांसद कृष्णा राज और आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप और पांचाल क्षेत्र के अध्यक्ष बीएल वर्मा को रखा है। कमेटी भाजपा नेता अजय जेटली को प्रशासन द्वारा बुलाने और उनकी पिटाई करने, एसएसपी द्वारा उन्हें लात मारने और धर्मस्थलों के पास गौवंशों का वध किए जाने के बाद कार्रवाई नहीं होने के मामले में रिपोर्ट में देगी। इससे पहले जिलाध्यक्ष ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाई थी जिसे विस्तार देते हुए प्रदेश कमान ने सांसदों की कमेटी बनाई है।
भाजपा कार्यकर्ता ने पत्थर फेंका हो तो हम करेंगे प्रशासन की मदद
केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि पुलिस दबिश के नाम पर लोगों के घरों में तोड़फोड़ न करे। प्रशासन ने वीडियोग्राफी कराई है उससे उपद्रवियों को चिन्हित करे। अगर भाजपा का कोई कार्यकर्ता पत्थर फेंकते हुए दिखता है उसे गिरफ्तार कराने में हम प्रशासन की मदद करेंगे। गंगवार ने बताया कि शनिवार को बरेली में रहेंगे और जिला कमेटी के साथ अधिकारियों से मिलकर इस मसले पर बात करेंगे।
भाजपा के कैंट विधायक और प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार के बवाल के बाद रात्रि में दबिश के नाम पर एसएसपी ने अपने सामने जिस प्रकार पुलिस से घरों के अंदर अमानवीय अत्याचार कराया है, घरों को लूटा है, महिलाओं को परेशान किया है, उन्हें पीटा है, बच्चों को भी नहीं छोड़ा और संपत्ति का नुकसान किया है, मैं इसकी घोर भर्त्सना करता हूं। हम शासन, मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए। अगर मंदिर के पास इस तरह की घटनाएं नहीं होती और यह दुष्कृत्य करने वालों को पकड़ लिया गया होता तो शांति बनी रहती। वास्तव में दोषी ये हैं। इन लोगों को जितनी हो कठोर सजा दी जाए।
मुझसे मत पूछो बवाल हो जाएगा- धर्मवीर
भाजपा नेताओं के निशाने पर आने के बाद भी एसएसपी धर्मवीर शुक्रवार को निश्चिंत दिखे। वे खुश थे कि बवाल टाल दिया गया। फतेहगंज पश्चिमी पुलिस चौकी के सामने मीडिया कर्मियों ने एसएसपी से ताजा हालात के बारे में जानने की कोशिश की तो मुस्कराने कर कहने लगे- मुझसे कुछ मत पूछो फिर बवाल हो जाएगा। जुमे की नमाज खत्म होने के बाद दोपहर करीब दो बजे चौकी में अलाव के पास बैठे एसएसपी के साथ बैठे डीएम संजय कुमार जैसे ही बाहर आए मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया। डीएम ने मीडिया को बताया कि हालात ठीक हैं। शनिवार को बाजार पूरी तरह खुलेगा। हमारी व्यापारियों से भी बात हो गई है। फिर एसएसपी से बात करने की कोशिश की, वह ये डायलॉग बोल गए। बाद में उन्होंने कहा कि कोई बेगुनाह जेल नहीं जाएगा। बवाल करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। आगे भी किसी ने माहौल खराब करने की कोशिश की तो कड़ी कार्रवाई होगी।
बलवे के 12 आरोपी गए जेल
फतेहगंज पश्चिमी में बृहस्परिवार को बलवा, पुलिस पर हमला और पथराव के आरोप में 12 लोगों को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस ने जेल भिजवा दिया है। मांस फेंकने के आरोप में चार को जेल भेजा गया है। बारह लोगों को शांतिभंग की आशंका में चालान करके एसडीएम मीरगंज के सामने पेश किया था। एसडीएम ने सभी को जमानत दे दी। बृहस्पतिवार की रात पुलिस ने बवाल करने के आरोप में नामजद भाजपा नेताओं के घरों में दबिश दी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उनके घरों में पुलिस कर्मियों ने तोड़फोड़ की। महिलाओं और बच्चों से भी अभद्रता भी की गई।
चेयरमैन जहीरउद्दीन उर्फ कुतुब के पोस्टर फाड़ने में नामजद भाजपा नेताओं के घर बृहस्पतिवार की रात पुलिस-पीएसी के जवानों ने दबिश दी। भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ के जिला संयोजक चक्रवीर सिंह चौहान का कहना है कि पुलिस ने उनके घर का दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। भाजपा जल प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अजय सक्सेना के घर का दरवाजा टूटा है। आरोप है कि यहां घर की महिलाओं से बदसलूकी की गई। ममता गंगवार समेत और भी सभी भाजपाइयों के घरों के दरवाजे पुलिस ने देर तक पीटे। भाजपा नेता अजय सक्सेना की मां और जानकी देवी इंटर कालेज की रिटायर्ड शिक्षिका कांती सक्सेना ने बताया कि भारी तादाद में खाकी वर्दीधारी पुलिस-पीएसी के जवान बृहस्पतिवार की रात लगभग सवा ग्यारह बजे उनके घर के बाहर आ धमके और लोहे का गेट पीटने लगे।
फाटक तोड़कर आठ-दस पुरुष पुलिस कर्मी अंदर घुस आए। पुलिस के जवानों ने कार का शीशा तोड़ डाला। बाइक, स्कूटी, सीलिंग फैन और घर का दीगर सामान भी तोड़फोड़ दिया। कमरों में घुसकर उनके साथ अभद्रता की। उनकी विवाहिता बेटी और पुत्रवधू प्रियंका से गाली गलौज और बदसलूकी की गई। कांती सक्सेना का कहना है कि पुलिस पार्टी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
उधर, चक्रवीर की मां और औंध की पूर्व प्रधान एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विनोद सिंह चौहान ने भी पुलिस पर लकड़ी के दरवाजे की चौखट उखाड़ने का आरोप गया है। कस्बे के रहने वाले उपेंद्र, विष्णु, अजय पाठक, भूपेंद्र, मुकेश, अमित शर्मा, यादराम, भगवानदास, गोपी, गोवर्धन, बबलू गुप्ता का पुलिस ने 7 क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट, जान लेवा हमला करने समेत कई संगीन धाराओं में चालान करके अदालत में पेश किया। अदालत से सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया। शांतिभंग की आशंका में जिन लोगों को पकड़ा गया था उन्हें एसडीएम मीरगंज कुंवर पंकज के सामने पेश किया गया, जहां से सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इनमें ज्यादातर कस्बे से बाहर के रहने वाले थे। कई नाबालिग बच्चों को भी पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ लिया था। एसपी देहात बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बलवा करने के बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है, नामजद लोगों ने यहां दबिश दी जा रही है। कुछ और लोग भी चिहिन्त किए गए हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फतेहगंज पश्चिमी में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा
बुधवार को धर्मस्थल के पास मांस डालने को लेकर हुए बवाल के बाद तीसरे दिन पुलिस ने किसी को घर से निकलने के लिए पाबंदी तो नहीं लगाई, लेकिन सड़कों पर सन्नाटा होने से कर्फ्यू जैसा माहौल था। गली-मोहल्लों की दुकानें खुली थीं, लेकिन मुख्य बाजार पूरी तरह से बंद रहा। सब्जी मंहगी हो गई। डीएम-एसएसपी की मौजूदगी में कड़े पहरे में जुमे की नमाज अदा कराई गई। लोग दहशत में घरों से नहीं निकले। बैंक और स्कूल भी आंशिक रूप से ही खुले। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और पीएसी सड़कों पर दिन-रात गश्त करती रही।
शुक्रवार की सुबह से ही फतेहगंज पुलिस चौकी जिला मुख्यालय में तब्दील हो गया। साप्ताहिक बंदी थी, लेकिन कभी बाजार पूरी तरह से बंद नहीं हो पाया, लेकिन बाजार तीसरे दिन भी पूरी तरह बंद रहा। बाजार में निकलने के लिए पुलिस ने किसी पर पाबंदी नहीं लगाई थी। इसके बाद भी लोग दहशत में थे। कुछ लोग हिम्मत करके सड़क तक आ भी जाते थे लेकिन उनकी मैन रोड तक आने की हिम्मत नहीं हो रही थी। बच्चे पुलिस को देखकर घरों से निकले ही नहीं। कस्बे से मैक्स-मैजिक-टेंपो न चलने से बरेली-मीरगंज दिशा की सवारियों को भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ीं।
जुमे की नमाज के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने पूरा होमवर्क कर रखा था। दोपहर करीब बारह बजे डीएम-एसएसपी भी एक ही गाड़ी से कस्बे में पहुंच गए। उनके आने से पहले एसपी आरए ब्रजेश श्रीवास्तव, एसडीएम कुंवर पंकज और सीओ डा. अरुण कुमार सिंह की अगुवाई में आरआरएफ और पुलिस-पीएसी जवानों, महिला आरक्षियों का संयुक्त फ्लैग मार्च कस्बे के मुख्य मार्ग पर निकाला गया। डीएम-एसएसपी ने चौकी पर बैठकर अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए और हालात का जायजा लेने के बाद दोनों करीब ढाई बजे जिला मुख्यालय लौट आए। कस्बे में तीन बार फ्लैग मार्च किया गया।
तीन दिन में करोड़ों का नुकसान हो गया
फतेहगंज पश्चिमी में तीन दिन से लगातार बाजार बंद रहने परकरोड़ों रुपये का कारोबारी घाटा हुआ है। एक करोड़ का घाटा तो बृहस्पतिवार को कस्बे का साप्ताहिक बाजार नहीं लगने से हुआ है। रिटेल के दुकानदारों की ब्रिकी के अलावा और भी तमाम आय के ऐसा साधन हैं, जो बवाल होने के बाद से पूरी तरह ठप है। उधर बवाल के बाद परीक्षा देने गए स्कूल-कालेजों में गए स्टूडेंट्स को भी कई किमी सड़क प़ैदल ही घर तक आना-जाना पड़ा। वाहन चालकों ने लोगों को रबर फैक्टरी कालोनी और मौर्य ढाबा तिराहों पर ही उतार दिया।
बच्चों को रहना पड़ा हवालात में
फतेहगंज पश्चिमी में हुए बवाल के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंकने वालों में बच्चे-बड़े सब शामिल थे। इनमें से कई ने पुलिस के डंडे खाए और कुछ को पुलिस उठा लायी। जूनियर हाईस्कूल से इंटर तक के भी कुछ छात्र थे जो खुद को निर्दोष बता रहे थे। इनके भविष्य को देखते हुए पुलिस ने इन्हें छोड़ तो दिया लेकिन कुछ ने एक रात हवालात में बितायी।
मौके से ऐसे ही कुछ छात्रों को उठा कर बीती रात कैंट थाने की हवालात में रखा गया था। मोहल्ला माली के अमित को तो अंदर भेज दिया गया। दोपहर में कैंट थाने में वह भी खुद को निर्दोष बता रहा था। वह बरेली कॉलेज का छात्र है। उसका कहना था कि घर में बैठा था और पुलिस उसे उठा लाई। उसका 14 वर्षीय भाई आलोक शर्मा कक्षा आठ में पढ़ता है। प्रियांश कक्षा नौ का छात्र है। पुलिस चौकी के पास रहता है। वार्ड नंबर छह का निशांत शर्मा इंटरमीडिएट में पढ़ता है। नई बस्ती का बबलू तांगा चलाता है पुलिस इन सबको भी उठा लाई थी।
पप्पू, गोवर्धन, छोटे लाल, शैलेश शंखधार, पप्पू कश्यप, गोपीचंद ने भी अपने को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह बाजार में आए थे और पुलिस उन्हें पकड़कर ले आई। आरोपी अधिक थे और सरकारी कंबल मुहैया नहीं थे, इसलिए पुलिस ने किराए पर रजाई गद्दे लाकर उन्हें दिए।
चेयरमैन बोले, खामखां दागदार हुआ मेरा कस्बा
शहर के जनप्रतिनिधि भी छोटी सी बात पर बड़ा बवाल होने से काफी दुखी है। उनका कहना है कि खामखां कुछ लोगों की वजह से उनका कस्बा दागदार हो गया। नगर पंचायत के चेयरमैन जहीरउद्दीन उर्फ कुतुब भाई ने कहा कि हमारे कस्बे में कभी ऐसा नहीं हुआ। लेकिन चंद लोगों ने सियासी मकसद से बवाल करा दिया।
पुलिस-प्रशासन सख्ती से काम न लेता तो बवाल और बढ़ जाता। वह मुझे टारगेट करके शहर का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं, लेकिन मैंने कभी विकास में भेदभाव नहीं किया। इसका प्रमाण यह है कि 60 फीसदी विकास के काम दूसरे समुदाय के लोगों के इलाके में कराकर भाईचारा बनाया है। विरोधियों को उनकी लोकप्रियता बर्दाश्त नहीं हो रही है।
कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए
पूर्व चेयरमैन सरजू यादव का कहना है कि कस्बे के कुछ नेताओं ने अपने फायदे लिए सभी को बदनाम करा दिया। धर्मस्थल के पास मांस डालने वाले के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही थी। ऐसे में किसी को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। बृहस्पतिवार को वह भी बवाल होने के बाद लोगों को समझाने गए थे लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी तो वापस लौट आए।