मोदी सरकार की 3 मोर्चों पर हुई किरकिरी
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मोदी सरकार शुक्रवार को तीन मुद्दों पर असहज दिखी। नेता विपक्ष के पद को अहम बताने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सरकार की किरकिरी हुई, तो उत्तराखंड के राज्यपाल के कोर्ट पहुंचने के बाद खुद गृह मंत्री राजनाथ सिंह को कहना पड़ा कि राज्यपाल से हटने के लिए कहा ही नहीं गया। वहीं, दिल्ली गैंगरेप को छोटी घटना बताकर घिरे वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी तीखी आलोचना के बाद सफाई देनी पड़ी।
नेता प्रतिपक्ष पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट लोकपाल की नियुक्ति के मकसद से ‘नेता प्रतिपक्ष’ संबंधी प्रावधान की व्याख्या करने पर राजी हो गया है। इसी के साथ उच्चतम न्यायालय ने केंद्र इस मामले में दो सप्ताह के अंदर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की बेंच ने पूछा कि ‘नेता प्रतिपक्ष’ न होने पर आखिर लोकपाल का चुनाव कैसे होगा? इसी के साथ शीर्ष अदालत ने मामले के अंतिम निपटान के लिए नौ सितंबर की तारीख तय कर दी।
गैर सरकारी संगठन ‘कामन काज’ के अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिए दाखिल की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले को लंबा नहीं खींचा जा सकता। इस पद के महत्व पर जोर देते हुए पीठ ने कहा कि विपक्ष का नेता सदन में सरकार से अलग स्वर का प्रतिनिधित्व करता है। पीठ ने यह भी कहा कि एलओपी (लोकपाल कानून के तहत) का मुद्दा न केवल लोकपाल में प्रासंगिक है बल्कि यह मौजूदा और आगामी विधेयकों के मामले में भी महत्वपूर्ण है। केवल कुछ नियम के आधार पर इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि भ्रष्टाचार की रोकथाम के मकसद से लाए गए लोकपाल कानून के अनुसार लोकपाल चयन समिति में प्रधानंमत्री और अन्य लोगों के अलावा नेता विपक्ष को भी सदस्य बनाया जाना है। सीवीसी और सीआईसी जैसे कई बड़े पदों के चुनाव में नेता विपक्ष का रोल अहम होता है। किसी भी विपक्षी पार्टी के पास लोकसभा में 10 फीसदी सदस्य संख्या (55) नहीं होने की वजह से स्पीकर ने फैसला दिया है कि इस बार कोई नेता विपक्ष नहीं होगा। वहीं लोकसभा में 44 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस इस पद के लिए कड़ी मशक्कत कर रही है लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा नियमों का हवाला दे रही है। इससे पूर्व, 24 अप्रैल को केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि वह लोकपाल के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के संबंध में तत्काल कोई फैसला नहीं करेगा। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से उसे भेजे गए नोटिस के जवाब में यह जानकारी दी थी।
भाजपा का रुख जस का तस
सुप्रीम कोर्ट के रुख का कांग्रेस सहित अन्य दलों ने जहां स्वागत किया वहीं भाजपा टस से मस नहीं हुई। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि नेता विपक्ष का दर्जा सरकार को देना चाहिए। वहीं भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि सरकार से जवाब मांगा गया है तो सरकार जरूर जवाब देगी। जहां तक परंपरा की बात है तो स्पीकर ने सारी चीजें देखने के बाद ही फैसला लिया है।
'हमने कुरैशी से पद छोड़ने को नहीं कहा'
उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्यपाल से पद छोड़ने के लिए कभी नहीं कहा गया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की ओर से कुरैशी को हटाने की कोई पहल नहीं की गई थी। वह राष्ट्रपति की मर्जी से संवैधानिक पद पर बने हुए हैं। सरकार जल्द ही इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में उचित जवाब दाखिल करेगी।
राजनाथ सिंह का यह बयान इस मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद आया है। मोदी सरकार की राज्यपाल के पद से हटाने की पहल के बाद कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है। शीर्ष अदालत ने गृह सचिव अनिल गोस्वामी को भी नोटिस जारी किया है। गोस्वामी पर कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए धमकी देने का आरोप है। याचिका में कहा गया है कि गोस्वामी ने कुरैशी को यह कहते हुए धमकी दी थी कि या तो वह इस्तीफा दें या फिर पद से हटने के लिए तैयार रहे।
कुरैशी पद से हटाए जाने की कोशिश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले पहले राज्यपाल हैं। इससे पहले मोदी सरकार ने मिजोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल को बर्खास्त कर दिया था। पिछले महीने कांग्रेस के पुराने नेता वीरेंद्र कटारिया को पुडुचेरी के राज्यपाल पद से हटा दिया गया था।
निर्भया गैंग रेप कांड को बताया था ‘छोटी घटना’
दिल्ली में राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली के भाषण के एक अंश को लेकर विवाद हो गया। खराब कानून-व्यवस्था किस तरह से पर्यटन को नुकसान पहुंचाते हैं, इसका जिक्र करते हुए उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि कैसे दिल्ली में रेप की एक छोटी घटना (निर्भया गैंग रेप कांड) को दुनिया भर में प्रचारित किया गया और देश को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ। वित्त मंत्री के इस बयान की कांग्रेस और कई अन्य संगठनों ने आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की।
बयान पर विवाद बढ़ता देख शुक्रवार को अरुण जेटली ने इस पर सफाई देते हुए कहा, मेरे बयान को गलत तरीके से समझा गया। रेप की घटना को छोटी घटना बताने की मंशा नहीं थी। मैंने दिल्ली में अपराध से हो रहे नुकसान के बारे में बोला था। मेरा मकसद किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। इसके बावजूद अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो मुझे इसके लिए खेद है। दरअसल, वित्त मंत्री सम्मेलन में कह रहे थे कि कम टैक्स और महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता के स्तर पर दो ऐसे मुद्दे हैं, जिससे पर्यटन उद्योग में जान फूंकी जा सकती है। कानून- व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में बलात्कार की छोटी घटना को दुनिया भर में प्रचारित किया गया और करोड़ों का नुकसान पहुंचा। कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी ने जेटली के बयान को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा ऐसे बयान इस सरकार की सोच को दर्शाते हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य निर्मला सावंत ने कहा, मंत्री का ऐसे बयान देना और यह तुलना करना कि ऐसी घटनाओं से देश को आर्थिक तौर पर कितना नुकसान होता है, बहुत ही गलत है।
निर्भया के परिजनों ने की आलोचना
निर्भया के परिजनों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है निर्भया की मां ने जेटली की टिप्पणी पर खेद जताते हुए कहा, इसने मुझे बहुत निराश किया है। चुनाव के दौरान उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए निर्भया के नाम का इस्तेमाल किया और चुनाव के बाद सत्ता में आने पर वे इसे ‘एक छोटी घटना’ बता रहे हैं। निर्भया के पिता ने कहा कि सार्वजनिक व्यक्तियों और मंत्रियों को अपनी वाणी में एहतियात बरतना चाहिए। उनके बयान भी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बनते हैं और देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि कोई भी बलात्कार ‘छोटी घटना’ नहीं होती है।