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SC ने लगाई अखिलेश सरकार को फटकार

Fri, 28 Aug 2015 09:21 PM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 28 Aug 2015 09:21 PM IST
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criminal trial is just a joke in uttar pradesh

बुलंदशहर में नाबालिग बलात्कार पीड़िता को पुलिस लॉक अप में रखने को लेकर चल रहे मुकदमे में बरती जा रही सुस्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है।

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नाराज शीर्ष अदालत ने यहां तक कहा कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में क्रिमिनल ट्रायल मजाक बन कर रह गया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले के ट्रायल में तेजी लाने केलिए कहा है।
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साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की सामाजिक न्याय पीठ ने पाया कि इस मुकदमे को दो साल हो गए लेकिन अब तक एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हो सका है।

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ट्रायल में लाएं तेजी

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ट्रायल में कोई प्रगति नहीं हुई है। पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी ट्रायल अपने मुकाम तक कभी नहीं पहुंचेगा। इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल गौरव भाटिया ने कहा कि आरोपी तो सुनवाई में आ रहे हैं लेकिन पीड़िता और गवाह ही अदालत नहीं आ रहे हैं।

जवाब में पीठ ने कहा कि गवाह आपके कर्मचारी हैं। सभी आपके लोग हैं, लिहाजा राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गवाह और पीड़ित सुनवाई में आएं।

पीठ ने राज्य सरकार को ट्रायल में तेजी लाने के लिए कहा है। साथ ही पीठ ने राज्य केपुलिस महानिदेशक को दिल्ली हाईकोर्ट के उस दिशानिर्देश को राज्य के तमाम थानों में भेजने के लिए कहा है जिसमें पुलिस को यह बताया गया था कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध केमामलों से किस तरह निपटना चाहिए।

पीड़िता को नहीं बंद किया गया लॉक अप में

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पीठ ने यह भी कहा कि सुर्कलर के साथ थानों तक इस घटना केबारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने दो महीने में मुकदमे की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल गौरव भाटिया ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि पीड़िता को लॉक अप में बंद नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि लॉकअप खुला हुआ था और पीड़िता उसके अंदर आराम कर रही थी।

गौरव भाटिया की यह दलील पीठ को नागवार गुजरी। पीठ ने कहा कि अगर आप आरोप से संतुष्ट नहीं थे तो आपने पुलिसकर्मियों को आरोपी क्यों बनाया।

इस पर गौरव भाटिया ने कहा कि जांच के क्रम में ये बातें सामने आईं। जवाब में अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, इसका मतलब साफ है कि जांच में इन लोगों के खिलाफ सबूत पाए गए होंगे।

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