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दिल्ली के दरिंदों पर लागू नहीं होगा बदला कानून

Tue, 05 Feb 2013 12:30 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 05 Feb 2013 12:30 AM IST
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criminal law amendment ordinance will not apply on delhi gangrape accused

महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ सरकार के नए अध्यादेश के जरिए कानून में किए गए बदलाव दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप के दरिंदों पर लागू नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि अध्यादेश लाने का मकसद आगे की घटनाओं को रोकना है। उसने साफ किया कि महिलाओं की सुरक्षा के उपाय सुझाने के लिए गठित जस्टिस वर्मा कमेटी की किसी भी सिफारिश को ठुकराया नहीं गया है।

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सरकार की दलील है कि दांपत्य जीवन में होने वाले बलात्कार, नाबालिग की उम्र सीमा और सैन्य बल विशेषाधिकार कानून से जुड़ी सिफारिशें जटिल मामले हैं। लिहाजा इस पर जल्दबाजी में फैसले नहीं लिए जा सकते। इन मुद्दों पर विचार किया जा रहा है और इन्हें संसद के बजट सत्र में बहस के बाद अपराध कानून संशोधन बिल में शामिल किया जाएगा।
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रेप से जुड़े कानूनों को सख्त करने संबंधी अध्यादेश को लेकर उठ रहे सवालों का सोमवार को मीडिया पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जवाब दिया। चिदंबरम ने कहा कि संविधान के मुताबिक कोई भी कानून जिस दिन से लागू होता है उसके बाद के संबंधित अपराधों पर ही उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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लिहाजा यह कानून भले ही दिल्ली गैंग रेप की प्रतिक्रिया में बनाया जा रहा है लेकिन यह उन आरोपियों पर लागू नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि उन आरोपियों पर फांसी की सजा संबंधी आईपीसी की धारा वैसे भी लागू हो रही है क्योंकि युवती की मौत हो चुकी है।    

चिदंबरम ने संसद सत्र की घोषणा के बावजूद अध्यादेश लाने को जायज ठहराते हुए कहा कि जस्टिस वर्मा कमेटी ने सरकार से रिपोर्ट पर संजीदगी के साथ जल्द कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। यही वजह है कि सरकार ने उन मसलों को अध्यादेश में शामिल पर उसे लागू कर दिया जिनपर सभी पक्षों की एक राय थी।

बाकी सिफारिशों के जटिल होने की वजह से उन पर पूरी बहस और मंत्रणा के बाद ही उन्हें कानून का रूप दिया जा सकेगा। संसद की स्थायी समिति अपराध कानून संशोधन पर काम कर रही है। संसद के बजट सत्र में अध्यादेश और उस बिल पर बहस के आधार पर ही यह काम संभव है।


दूसरी बार दुष्कर्म में भी मृत्युदंड संभव

चिदंबरम ने कहा कि अध्यादेश में बलात्कार के कारण हुई मौत पर फांसी की सजा तय की गई है। इसके अलावा महिला के घटना की वजह से लंबे वक्त के लिए कोमा में चले जाने की सूरत में भी फांसी दी जा सकती है। यदि कोई बलात्कारी दूसरी बार भी दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया जाता है, तब भी उसे मृत्युदंड दिया जा सकता है।

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