श्मशान से पहुंच रहा है ताजमहल को नुकसान: जस्टिस कुरियन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ताजमहल की खूबसूरती पर संभावित खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज कुरियन जोसेफ ने भारत के प्रधान न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट को दखल देने के लिए कहा है। जस्टिस कुरियन ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 17वीं शताब्दी की इस ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता पर कोई आंच न आए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू को पत्र लिखकर जस्टिस कुरियन ने कहा है कि पास स्थित श्मशान घाट से निकलने वाला धुआं ताजमहल पर असर डाल रहा है। इससे ताजमहल की खूबसूरती प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में तत्काल दखल देना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस विश्व धरोहर पर प्रदूषण का असर न पड़े।
जस्टिस कुरियन के इस पत्र पर न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर के अध्यक्षता वाली विशेष पीठ सोमवार को गौर करेगी। यह पीठ ताज ट्रेपेजियम जोन पर हरित पट्टी कायम रखने को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। करीब 30 वर्ष पूर्व पर्यावरणविद् एमसी मेहता द्वारा दाखिल इस याचिका पर अब तक अदालत कई निर्देश जारी कर चुकी है।
रोज जलाए जाते हैं औसतन 20-25 शव
जानकारी के मुताबिक जस्टिस कुरियन ने यह पत्र एक अक्तूबर को चीफ जस्टिस एचएल दत्तू को लिखा था। दरअसल, जस्टिस कुरियन अपने परिवार के साथ ताजमहल घूमने गए थे। ताजमहल के दर्शन के दौरान उन्होंने पाया कि बगल में श्मशान घाट है। उन्हें यह लगा कि शव जलाए जाने से होने वाले धुएं के कारण ताजमहल के सफेद संगमरमर को नुकसान पहुंच सकता है।
चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में जस्टिस कुरियन ने कहा है कि आगरा प्रशासन को श्मशान घाट को ताजमहल से दूर शिफ्ट करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। जस्टिस कुरियन को कुछ अधिकारियों ने बताया कि श्मशान घाट पर औसतन 20 से 25 शव रोजाना जलाए जाते हैं। बताया गया कि किसी-किसी दिन तो यह आंकड़ा 100 तक पहुंच जाता है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि पूर्व में कई बार श्मशान घाट को शिफ्ट करने की मांग की गई है। मालूम हो कि पुरातत्व विभाग का भी मानना है कि श्मशान घाट से निकलने वाले धुएं से ताजमहल पीला पड़ रहा है।