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तीसरे मोर्च से तौबा, खुद की जड़ें मजबूत करेगी माकपा

Tue, 14 May 2013 01:42 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Tue, 14 May 2013 01:42 AM IST
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cpm will not involved in formation of third front

लोकसभा चुनाव पूर्व तीसरे मोर्चे के गठन को पलीता लगता दिख रहा है। नब्बे के दशक से ही गैर कांग्रेस-गैर भाजपा विकल्प की नींव रखती आई माकपा ने इस बार ऐसे किसी मोर्चे से अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।

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सेंट्रल कमेटी की बैठक में गहन मंथन के बाद पार्टी ने तीसरे मोर्चे के गठन पर ऊर्जा खर्च करने के बजाए वाम मोर्चा की जड़ें मजबूत करने का फैसला किया है।

हालांकि माकपा कुछ राज्यों में कुछ दलों के साथ सीटों का तालमेल जरूर करेगी। पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने भी कहा है कि वाम मोर्चा के एजेंडे में इस बार तीसरे मोर्चे के गठन का कोई प्रस्ताव नहीं है। फिलहाल माकपा का सारा ध्यान अपनी जड़ें मजबूत करने पर है।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार सेंट्रल कमेटी ने केरल में पार्टी के अंदरूनी विवाद, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलने के साथ तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाओं पर गंभीर विचार विमर्श किया।
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ज्यादातर नेताओं का मानना था कि तीसरे मोर्चे के नाम पर कई दल एकजुट तो होते हैं, मगर चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ता से जुड़ने में परहेज नहीं करते। इसलिए बेहतर हो कि पार्टी पहले केरल और पश्चिम बंगाल की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंके और इसके साथ ही हिंदी पट्टी के पुराने प्रभाव वाले इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करे।

बैठक के बाद माकपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की दिलचस्पी गैर भाजपा-गैर कांग्रेस विकल्प खड़ा करने में नहीं प्रधानमंत्री पद पाने में है। ऐसे दल तीसरे मोर्चे को महज अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने का हथियार बनाना चाहते हैं।

ऐसे में वाम दलों का जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले और चुनाव के बाद भी गैर भाजपा-गैर कांग्रेस ताकत को मजबूत करने का है, उसका हाथ हमेशा से खाली ही रहा है। इसलिए बैठक में सवाल उठे कि वाम मोर्चा को इस बार तीसरे मोर्चे के गठन में दिलचस्पी नहीं लेनी चाहिए।

उक्त नेता ने बताया कि माकपा की वर्तमान रणनीति कुछ चुनिंदा दलों के साथ सीटों का तालमेल करने का जरूर है, लेकिन तीसरे मोर्चे के गठन का मामला हमारे एजेंडे में दूर दूर तक नहीं है।


उल्लेखनीय है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के कांग्रेस से नजदीकी होने के बाद माकपा ने सपा के बिना ही तीसरे मोर्चे के गठन के लिए प्रयास करने का मन बनाया था। मगर अंत में इससे पूरी तरह से परहेज करने का फैसला किया गया।

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