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बीजेपी के डर से श्रीकृष्ण की शरण में पहुंची सीपीएम

Wed, 02 Sep 2015 06:55 PM IST
Updated Wed, 02 Sep 2015 06:55 PM IST
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CPM planning to organize Krishna Janmashtami

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीएम) की केरल इकाई ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की ओर अपने कैडरों के बढ़ते झुकाव को रोकने के लिए पार्टी ने पांच सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का फ़ैसला लिया है।

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नाम न जाहिर करने की शर्त पर सीपीएम के एक नेता ने कहा कि पार्टी में बच्चों की शाखा बालसंगम जन्माष्टमी के मौक़े पर विशाल जुलूस निकालेगी और मिठाई बांटेगी। यह आयोजन बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा संघ की बाल शाखा बालगोकुलम करती है।
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केरल के राजनीतिक विश्लेषक जैकब जॉर्ज इस बारे में अपनी राय देते हुए कहते हैं, "केरल के अंदर ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर अधिक रुझान देखा जा रहा है और सीपीएम इसे महसूस कर रही है।"

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भक्त के मार्ग से बीजेपी से छूटकारा

CPM planning to organize Krishna Janmashtami

उन्होंने कहा, "सीपीएम की यह पहल केरल के उत्तरी जिलों खासकर कन्नूर में साफतौर पर बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को दिखाती है। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से सीपीएम अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है।"

"श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने के पीछे सीपीएम का मुख्य मक़सद जमीनी स्तर पर बीजेपी और संघ की ओर पलायन करने वाले कैडरों को रोकना है।" जैकब आगे बताते हैं, "इस आयोजन के पीछे एक मकसद यह भी है कि जो कैडर बीजेपी को छोड़कर सीपीएम में आए हैं उन्हें मानसिक तौर पर संतुष्टि मिले। यह बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से निपटने का धार्मिक तरीका है।"

बीजेपी भी सीपीएम के इस क़दम को वामदल के अंदर बढ़ते असुरक्षा के रूप में देखता है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के सुरेंद्रन ने बताया, "हम दशकों से जाति, लिंग और राजनीति से ऊपर उठकर शोभायात्रा निकालते आ रहे हैं। इस मौक़े पर समाज के हर तबके के लोग शामिल होते हैं। यहां तक कि सीपीएम के सदस्य भी इसमें भाग लेते हैं। यही उनकी असुरक्षा की भावना को बढ़ा रहा है।"
टकराव

साख बचाने की कोशिश

CPM planning to organize Krishna Janmashtami

इस बीच सीपीएम के मुखपत्र 'देशाभिमानी' में छपा है, "पार्टी हफ़्ते भर से चले आ रहे ओनम उत्सव का समापन समारोह भी आयोजित करने जा रही है जो कि इत्तेफाक से पांच सितंबर को ही पड़ रहा है।"

सीपीएम के कन्नूर जिले के सचिव पी जयराजन का कहना है, "पार्टी का श्रीकृष्ण जयंती के उत्सव या दूसरे किसी भी उत्सवों से कोई लेना-देना नहीं है।"

इस बीच कन्नूर के स्थानीय लोग इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि दो प्रतिद्वंदी दलों की ओर से एक जैसे तरीक़े के साथ उत्सव मनाने से टकराव के हालात ना पैदा हो जाएं।

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