अभी टला नहीं है शाह पर खतरा
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गुजरात की अदालत इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में भाजपा महासचिव अमित शाह के खिलाफ मौजूदा सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई के आदेश दे सकती है। सीबीआई को इस मामले में अदालत के शाह के रोल संबंधी फैसले का इंतजार है।
सीबीआई ठोस सबूतों की कमी के आधार पर मामले की एफआईआर और चार्जशीट में शाह का नाम भले ही नहीं डाल पाई हो, लेकिन उन पर से खतरा पूरी तरह टला नहीं है। सीबीआई अदालत के आदेश पर शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है।
सीबीआई प्रवक्ता कंचन प्रसाद ने अमर उजाला को बताया कि बुधवार को गुजरात की अदालत के सामने एजेंसी ने अपनी तहकीकात और शाह के रोल संबंधी मौजूदा सबूतों को रख दिया। यह अदालत के ऊपर है कि वह इस बारे में आगे क्या फैसला लेती है।
जावेद शेख के पिता ने दायर की अर्जी
प्रवक्ता के मुताबिक इशरत के साथ मारे गए जावेद शेख के पिता गोपीनाथ पिल्लई ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत शाह और अहमदाबाद पुलिस के पूर्व कमिश्नर के आर कौशिक को आरोपी बनाने की अर्जी दी है।
इस धारा के तहत अदालत मौजूदा सबूतों के आधार पर ही शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन पर कानूनी कार्रवाई का आदेश दे सकती है।
जहां तक शाह को सीबीआई की क्लीन चिट देने का सवाल है, यह तभी साफ हो गया था, जब एजेंसी ने पुख्ता सबूतों के आधार पर उनका नाम न तो एफआईआर में डाला और ना हीं चार्जशीट में।
आरुषि मामले में भी दिए थे आदेश
जावेद केरल के हिंदू परिवार का लड़का था और पुणे की मुसलमान लड़की से शादी से पहले उसने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था।
सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इसी तरह पुख्ता सबूतों की कमी के आधार पर एजेंसी ने बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में अपनी क्लोजर रिपोर्ट डाली थी।
लेकिन अदालत ने उन्हीं सबूतों के आधार पर आरुषि के माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा चार्जशीट दायर करने के बाद अमर उजाला को दिए गए बयान में कह चुके हैं कि मामले की जांच में शक की सुई कई बार शाह की ओर घूमी है।
लेकिन ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि अभियोजन पक्ष होने के नाते उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। सीबीआई की जिम्मेदारी सिर्फ आरोप लगाना नहीं बल्कि सबूतों के आधार पर उसे साबित करना भी है।
अगर अदालत को लगता है कि इन्हीं सबूत के आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है तो एजेंसी को कार्रवाई करने में कोई परेशानी नहीं।