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पुलिस की लापरवाही, चार्जशीट में हत्या की धारा नहीं

Sat, 05 Jan 2013 11:11 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 05 Jan 2013 11:11 PM IST
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court says sufficient evidence against accused in delhi gangrape

चलती बस में गैंगरेप के मामले में दिल्ली पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 3 जनवरी को जो चार्जशीट दिल्ली पुलिस ने अदालत में फाइल की उसमें हत्या का आरोप गायब है।

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दिल्ली पुलिस ने अदालत में स्वीकार किया कि गैंगरेप के आरोपियों के खिलाफ हत्या के गंभीर आरोप (दफा 302) का जिक्र करना भूल गई। पुलिस ने इसे टाइपिंग में गलती का मामला बताया है।
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पुलिस ने कोर्ट से गुजारिश की कि इस चूक के लिए वह अर्जी दाखिल करना चाहती है। हालांकि अदालत ने उसे यह अनुमति देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब वह पूरी चार्जशीट पर संज्ञान ले रही है तो पुलिस को अलग से याचिका दाखिल करने की जरूरत नहीं है।
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इस मामले में अदालत ने माना कि राम सिंह समेत पांच अभियुक्तों के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या पर्याप्त सुबूत हैं। आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप, हत्या आदि की धाराओं में मुकदमा चलाया जा सकता है।

अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए पांचों आरोपियों को सात जनवरी को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। मालूम हो कि छठे नाबालिग आरोपी का चार्जशीट में नहीं शामिल किया गया है। पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ 3 जनवरी को आरोपपत्र दाखिल किया था।

साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने कहा कि अभियुक्तों पर गंभीर आरोप हैं। डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इनके खिलाफ मामला बनता है। अदालत ने प्रोडक्शन वारंट जारी करते हुए पुलिस को आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन कुमार, अक्षय ठाकुर को 7 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। उसी दिन अभियुक्तों को आरोपपत्र से जुड़े दस्तावेज दिए जाएंगे।

इससे पूर्व विशेष अभियोजन अधिकारी राजीव मोहन ने अदालत को सभी अभियुक्तों के अपराध और उन पर लगाई गई 13 धाराओं का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि सिंगापुर स्थित माउंट एलिजाबेथ अस्पताल की रिपोर्ट में कहा गया है कि युवती की मौत उसके शरीर में इंफेक्शन फैलने व अंगों के काम बंद करने से हुई थी।

युवती के शरीर में गंभीर अंदरूनी चोट पाई गई। इसी आधार पर अभियुक्तों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि धारा 164 के तहत युवती व उसके दोस्त के बयानों में सभी अभियुक्तों द्वारा गैंगरेप का जिक्र है। डीएनए रिपोर्ट में अभियुक्तों के कपड़ों पर युवती का ब्लड मिला है।

उन्होंने कहा कि अभियुक्तों ने युवती और उसके दोस्त के कपड़े जला दिए। जले हुए कपड़ों से ब्लड सैंपल मिला है जो युवती के ब्लड से मैच करता है। यानी साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया गया। इसी प्रकार अभियुक्त दोनों को गाड़ी में जबरन ले गए, इस कारण उन पर धारा 365 लगाई गई है।

अभियुक्तों के पास से दोनों पीड़ितों के एटीएम, मोबाइल फोन, पर्स आदि सामान बरामद हुआ है, इस कारण उनको धारा 412 के तहत अभियुक्त बनाया गया है। अभियुक्तों ने दोनों से हथियारों के बल पर डकैती की और गंभीर चोट पहुंचाई, इस आधार पर उन पर धारा 394, 395 व 397 लगाई गई है।

सभी ने एक साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया व अप्राकृतिक कृत्य किया। इस आधार पर धारा 120 बी, 377/34 लगाई गई हैं। मोहन ने कहा कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने में कुछ वक्त लगेगा क्योंकि संबंधित अदालत पहले पहले उसके बोन टेस्ट की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज देखेगी।

ये धाराएं लगीं
अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 376-2 (जी)(गैंगरेप), 365(अगवा करना), 394, 395, 396, 397,(डकैती, डकैती में घायल और हत्या करना),  377 (कुकर्म), 120 बी(षड्यंत्र), 201(सुबूत नष्ट करने), 412 (चोरी का सामान बरामद होना) व 34 (साजिश) लगाई गई हैं।


--आरोप सही पाए जाने पर इन धाराओं में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है।

युवती की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सिंगापुर से 20 जनवरी तक मिलने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट मामले में अहम सुबूत होगी।--राजीव मोहन, विशेष सरकारी वकील

मित्र ने कहा, जल्द मिले न्याय
गैंगरेप की शिकार युवती के दोस्त ने कहा है कि इस मामले में जल्द से जल्द इंसाफ मिलना चाहिए। उसने मांग की कि तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी होनी चाहिए। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर पहुंचे मित्र ने कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में चल रही है पर हम यही चाहते हैं कि यह जल्द पूरी हो।

उसने कहा कि सभी मामलों में लोगों को जल्द न्याय दिलाने की कोशिश की जानी चाहिए। सभी अदालतों को फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया जाना चाहिए।

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