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मजबूरी बलात्कारियों का बच्चा पैदा करने की

Thu, 16 Apr 2015 06:02 PM IST
Updated Thu, 16 Apr 2015 06:02 PM IST
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court  rejects plea to abort foetus

गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत की 24 साल की बलात्कार पीड़िता की गर्भपात की फ़रियाद को मानने से इनकार कर दिया है। यह बलात्कार पीड़िता 28 हफ़्तों से गर्भवती थीं। इन्होंने गैंग रेप के कारण गर्भ में आए बच्चे का गर्भपात कराने के लिए अदालत में गुहार लगाई थी। पीड़िता को सूरत में उनके घर से अगवा कर लिया गया था और लगातार 6 महीनों तक 7 लोगों ने उनके साथ गैंग रेप किया था।

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इससे पहले इन्होंने बोटाड में एक निचली अदालत में गुहार लगाई थी। तब वे 24 हफ़्तों की गर्भवती थीं। उनकी इस अर्जी को 26 मार्च को खारिज कर दिया गया था।

अपने ससुराल और मायके में विरोध के बाद उन्होंने अजन्मे बच्चे को गिराने के लिए अदालत से मंज़ूरी माँगी थी। महिला के पति और ससुराल वालों ने उन्हें और उनके होने वाले बच्चे को स्वीकार करने से मना कर दिया था।
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7 आरोपियों से सिर्फ़ 3 को ही अब तक पकड़ा

court  rejects plea to abort foetus

न्यायालय ने मेडिकल टर्मिनेशमन ऑफ़ प्रेगनेंसी क़ानून 1971 की धारा 3 के तहत 20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को गिराने का आदेश देने से मना कर दिया। पीड़िता के दो बच्चे हैं, और अजन्मे बच्चे को जन्म देने के बाद अपने और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता है।

न्यायाधीश जेबी पार्दीवाला के अनुसार वे पीड़िता का दर्द और चिंता समझते हैं पर क़ानून के अनुसार एक अजन्मा बच्चा भी एक जीवित प्राणी है और उसे ज़िंदा रहने का हक़ है, जिसका समर्थन किया जाना आवश्यक है।

वे कहते हैं कि चूँकि अब गर्भावस्था आगे बढ़ चुकी है, गर्भपात से महिला के जीवन को ख़तरा है। बलात्कार के 7 आरोपियों से सिर्फ़ 3 को ही अब तक पकड़ा जा सका है।

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