केजरीवाल और आप को बड़ी राहत, नहीं होगा केस दर्ज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी को कोर्ट से राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने उन पर फर्जी घोषणाएं कर आम लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले में दायर याचिका खारिज कर दी।
याचिका में इन सभी पर आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एमएल शर्मा को बार-बार इस संबंध में आग्रह करने पर फटकार भी लगाई।
अदालत ने लगाई फटकार
अदालत ने कहा यदि किसी से धोखाधड़ी हुई है तो वह स्वयं ही शिकायत दर्ज करवा सकता है, ऐसे में इस याचिका को जनहित में स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने कहा आप और उसके सदस्यों ने दो करोड़ लोगों से धोखा किया है।
अदालत ने कहा क्या इनमें से एक भी आपके साथ जाकर थाने में शिकायत नहीं करवा सकता। याची ने कहा यदि इस प्रकार उन्हें नहीं सुना गया तो अधिकारी आम लोगों को लूटेंगे।
याचिकाकर्ता ने कहा गुमराह कर रहे केजरीवाल
खंडपीठ ने उनके रवैये पर आपत्ति जताते हुए कहा आप भाषण न दें। फैसला हमें देना है आप (याची) फैसला नहीं दे सकते।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि पिछले काफी अरसे से विभिन्न राजनीतिक पार्टियां आपराधिक खेलते हुए अपने घोषणापत्र में फर्जी घोषणाएं कर लोगों से धोखाधड़ी रह रही है। उन्होंने कहा ऐसे में उनकी आपराधिक जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
उन्होंने कहा वर्ष 2011 से जन लोकपाल बिल के नाम पर केजरीवाल और उनके साथी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी बनाकर केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने अपने 69 सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी घोषणापत्र तैयार कर लोगों के विश्वास को ठेस पहुंचाई।
'लोगों को किया गुमराह'
न लोगों ने वोट पाने के लिए यह सब किया। उन्होंने कहा पार्टी ने 29 को जनलोकपाल बिल पास करने, 50 प्रतिशत बिजली की दरे कम करने, 700 लीटर पानी मुफ्त देने इत्यादि वायदे किए। कांग्रेस-भाजपा को भ्रष्ट व स्वयं को ईमानदार बताया।
उन्होंने कहा केजरीवाल ने 28 दिसंबर को अल्पमत सरकार बनाई लेकिन तय घोषणापत्र के अनुसार 29 दिसंबर को जनलोकपाल बिल पास नहीं करवाया। इसके अलावा बिजली के बिलों में 400 यूनिट तक सब्सिडी देने का तर्क रखा जबकि शीला सरकार पहले ही 25 प्रतिशत सब्सिडी दे रही थी।
इस प्रकार कैसे उन्होंने 50 प्रतिशत की छूट दी। इसी प्रकार 700 लीटर मुफ्त पानी भी नहीं दिया। उन्होंने कहा यह सब व्यक्तिगत फायदे के लिए मुख्यमंत्री कार्यालस का दुरुपयोग है। इसके अलावा यह सरासर लोगों से धोखाधड़ी है। अत: सीबीआई को इन तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।