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‘वैवाहिक विवादों में बच्चों को न बनाएं मोहरा’

Sat, 04 Jan 2014 10:25 AM IST
एजेंसी/मुंबई
एजेंसी/मुंबई Updated Sat, 04 Jan 2014 10:25 AM IST
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court grants temporary access of minor boy to separated mother

माता-पिता के बीच वैवाहिक विवादों के बीच बच्चों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्हें कानूनी लड़ाई में पड़ने से बचाया जाना चाहिए।

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यह बात बांबे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कही। कोर्ट ने मामले में एक मां को उसके 12 वर्षीय बच्चे से अस्थाई तौर पर मिलने की मंजूरी भी दी।

मामले की सुनवाई कर रहे बांबे हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम पटेल ने फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और 4 जनवरी से 12 जनवरी तक मां को अपने बेटे से मिलने की मंजूरी दे दी।

जस्टिस पटेल ने कहा, ‘एक बच्चे को मां-बाप के बीच की कानूनी लड़ाई में कभी मोहरा नहीं बनाना चाहिए। बच्चे को सावधानी से आपसी कड़वाहट और तकरार से दूर रखना चाहिए। बच्चे के दिल पर इन विवादों का बुरा असर पड़ता है। इसीलिए ऐसे समय बच्चे के हित में जो भी बेहतर हो, वह करना चाहिए।’
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दरअसल, बच्चे के पिता ने अपनी याचिका में फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए 24 दिसंबर, 2013 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बच्चे को अपनी मां से अस्थाई तौर पर मिलने की मंजूरी दी गई थी।
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लड़के के माता-पिता 2010 से ही अलग रह रहे हैं। अलगाव के बाद से ही लड़का लखनऊ में अपने पिता के पास रह रहा है, जबकि उसकी मां मुंबई में रह रही है।

लड़का अपनी मां से हर रोज कुछ मिनट इंटरनेट पर वीडियो कॉलिंग के जरिये बात करता था।

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