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इलाहाबाद हाइकोर्ट ने पूछा- कौन सी खूबी है नोएडा के चेयरमैन में?

Wed, 02 Sep 2015 10:29 PM IST
Updated Wed, 02 Sep 2015 10:29 PM IST
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court asked that what is the special quality of noida chairman

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के चेयरमैन का एक साथ पद संभालने वाले आईएएस अधिकारी रमारमण की तैनाती पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। पूछा है कि ऐसी कौन सी वजह है जो एक ही अधिकारी इन प्राधिकरणों में लंबे समय से जमे हैं।

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अगर यह इतने ही काबिल हैं तो इनकी जरूरत दूसरे स्थानों पर भी है। ऐसा क्या है कि जो नोएडा में तैनात होता है वहीं जमा रहता है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है उनको पता है। मुख्य सचिव हलफनामा दाखिल कर इन प्राधिकरणों में तैनात अधिकारियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराएं।
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नोएडा के जितेंद्र कुमार गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति शशिकांत की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारियों के नौकरी में आने की तारीख से अब तक उनकी तैनाती का पूरा ब्यौरा हलफनामा दाखिल कर उपलब्ध कराया जाए। याचिका में कहा गया कि रामारमण नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के के चेयरमैन तथा सीईओ का पद एक साथ संभाल रहे हैं।

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कई अधिकारी पाए गए घोटालों में लिप्त

court asked that what is the special quality of noida chairman

यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी के भी वह चेयरमैन हैं। वह लंबे समय से इसी पद पर जमे हैं तथा यादव सिंह केस में जांच के दौरान सीबीआई ने कई प्लाटों के आवंटन में धांधली पाई है। इन प्राधिकरणों के कई अधिकारियों की भूमि घोटालों में संलिप्तता पता चली है।

याचिका का विरोध यमुना एक्सप्रेस, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के वकीलों ने किया। उन्होंने याचिका की पोषणीयता पर प्रश्न उठाया। बताया कि रामारमण प्रतिनियुक्ति पर 2010 में आए हैं इससे पूर्व उनकी तैनाती दूसरे स्थानों पर थी। यमुना एक्सप्रेस वे का चेयरमैन संतोष यादव को बनाया गया है।

वकीलों का कहना था उपरोक्त तीनों प्राधिकरण औद्योगिक विकास प्राधिकरण हैं, इनकी स्थिति अन्य विकास प्राधिकरणों से भिन्न है। यह भी बताया कि यमुना एक्सप्रेस- वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का सीईओ संतोष यादव को बनाया गया है। कोर्ट ने उनको भी याचिका में पक्षकार बनाने के लिए कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तिथि नियत की गई है।

छोटों के पास भी करोड़ों की प्रापर्टी

court asked that what is the special quality of noida chairman

याची का कहना है कि नोएडा के चतुर्थश्रेणी कर्मचारी नितिन राठी की सेक्टर 12 में 10 करोड़ रुपये कीमत की कोठी है। 87 प्लाटों का आवंटन बिल्डरों को कौड़ियों के भाव कर दिया गया।

इन पर 20 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। अथॉरिटी इसकी वसूली नहीं कर पा रही है। वेब सिटी, लीज बैक पॉलिसी और माधव समाज समिति के मामले में व्यापक धांधली की गई है।

याची ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। याचिका में नोएडा के सीईओ रमारमण, एसीईओ पीसी गुप्ता, वित्त नियंत्रक ललित को पक्षकार बनाया गया है।

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