दहशतगर्दी को देश ने दिया जवाब

मुंबई/सुमंत मिश्र/एजेंसी Updated Thu, 22 Nov 2012 12:16 AM IST
country reacted to terrorism
आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा। देश पर किसी ने बुरी नजर डाली तो उसका अंत बुरा होगा। मुंबई हमलों के एक मात्र जीवित गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अफजल कसाब को भारत ने बुधवार को फांसी पर लटका कर दहशतगर्दी करने वालों को करारा जवाब दिया। 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला करके देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने वाले कसाब को बुधवार को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया गया।

हमले की चौथी बरसी के कुछ दिनों पहले सरकार ने ‘ऑपरेशन एक्स’ नाम से फांसी की तैयारियों को इस तरह अंजाम दिया कि किसी को कानोंकान खबर नहीं हुई। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी फांसी की तारीख की भनक नहीं थी। सुबह 7.34 बजे कसाब को फांसी पर लटकाने के बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने देश इसकी को खबर दी।

उल्लेखनीय है कि विशेष अदालत ने कसाब को दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पांच नवंबर को उसकी दया याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। पुणे के यरवडा जेल सूत्रों के अनुसार सुबह साढ़े पांच बजे कसाब को जगाया गया। नहलाया गया। 6 बजकर 50  मिनट पर उसने कोठरी में नमाज अदा की और अंत में दोनों हाथ आसमान की ओर करके कहा, ‘अल्लाह मुझे माफ करना।’ बाद में जेल के अधिकारी और ‘ऑपरेशन एक्स’ का नेतृत्व करने वाले स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल देवेन भारती उसे फांसी के तख्ते तक ले गए।

फंदे पर ले जाने के पहले उससे जब अंतिम इच्छा पूछी गई तो कसाब ने कहा कि मेरी कोई अंतिम इच्छा नहीं है ना ही मुझे कोई वसीयत करनी है। मुंबई के आर्थर रोड जेल से सोमवार की आधी रात में डेढ़ दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों की देखरेख में कसाब को यरवडा जेल ले जाया गया। जहां 30 घंटे बाद ही उसे फांसी दी गई। 25 वर्षीय कसाब को जेल परिसर में ही दफन कर दिया गया। 2004 के बाद यह पहला मौका है जब भारत में किसी को फांसी की सजा दी गई है।

संभवत: फांसी की गोपनीयता के कारण ही मंगलवार को भारत ने पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक से वीजा नियमों में ढील संबंधी अपनी यात्रा स्थगित करने का कहा था। भारत ने मलिक से कहा कि उनके आने की तारीख ‘अनुकूल नहीं’ लगती।

उल्लेखनीय है कि 26/11 हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंध अभी तक सामान्य नहीं हो सके हैं। वैसे पाकिस्तान को कसाब को दिए जाने की सूचना पहले ही दे दी गई थी। मगर उसने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा मांग किए जाने पर कसाब का शव उसे सौंप दिया जाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा, ‘हमले में जान गंवाने वाले सभी लोगों और शहीद होने वाले पुलिस-सैन्य अधिकारियों को आज न्याय मिला।’ कसाब को फांसी की खबर के बाद मुंबई में लोग खुश नजर आए। उल्लेखनीय है कि दस आतंकियों के 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान से हमला संचालित हो रहा था। बाद में भी पाकिस्तान सरकार हमले को अंजाम देने वाले लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों और षड्यंत्रकारियों को बचाती रही।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों के षड्यंत्र में शामिल होने के सबूत भी भारत ने पेश किए। पाकिस्तान में राजदूत रहे जी पार्थसारथी के अनुसार, ‘कसाब तो सिर्फ मोहरा था। जनरल इसलामाबाद में बैठे हैं। उन्हें सजा मिलेगी, तब न्याय पूरा होगा।’ कसाब को फांसी के बाद उसके एक वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सजा बरकरार रखने के बाद कसाब परेशान और डरा हुआ था। उसने तब रामचंद्रन से कहा था, ‘क्या तुम जेल से निकलने में मेरी मदद कर सकते हो?’

लश्कर ने दी हमलों की धमकी
मुंबई पर हमला करने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने अजमल कसाब को फांसी पर लटकाने के बाद भारत पर हमले की धमकी दी है। पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय इस संगठन के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा कि उसकी फांसी हमें और हमले करने के लिए प्रेरित करेगी। एक अज्ञात स्थान से फोन पर इस आतंकी ने कहा, ‘वह हीरो था और हमारे लड़ाके कसाब के बताए रास्ते पर चलेंगे।’

निष्पक्ष सुनवाई हुई: निकम
'कसाब की सुनवाई बिना भेदभाव के निष्पक्ष हुई। उसका सच पाकिस्तान के जियो टीवी ने उजागर किया था। वह उसके गांव की खबर ले आया था। तब कसाब ने अदालत में कहा था कि जियो टीवी भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट है। अब आप समझ सकते हैं कि वह कितना चालाक था।'
- उज्ज्वल निकम, कसाब के विरुद्ध मुकदमा लड़ने वाले वरिष्ठ वकील

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