जन्मदिन विशेष: 'परमाणु पुरुष' भाभा पर देश को है नाज

इंटरनेट डेस्क/धर्मेंद्र आर्य Updated Tue, 30 Oct 2012 06:04 PM IST
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मुंबई निवासी मेहरभाई भाभा ने जब देखा कि उनका बेटा बहुत कम सोता है तो उन्होंने अपने पति जहांगीर भाभा से कहा कि हमारा बेटा तो सोता ही नहीं है। दोनों पति-पत्नी ने अपने बेटे को डॉक्‍टर को दिखाया। डॉक्टर ने बच्चे की जांच की और दंपति को तसल्ली देते हुए बताया कि आप चिंता ना करें, यह बच्चा हाइपर एक्टिव है, सोता कम है, लेकिन सोचता खूब है। इस बच्चे का नाम था होमी जहांगीर भाभा।

परमाणु कार्यक्रम के भविष्य की मजबूत नींव रखी
होमी जहांगीर भाभा वह नाम है, जिसने हिंदुस्तान के परमाणु कार्यक्रम को बुलंदियों पर ले जाने का सपना देखा था। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिसके चलते भारत आज विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की कतार में पूरी शान से खड़ा है। मुंबई में 30 अक्टूबर 1909 को जहांगीर होरमुसजी भाभा और महरबाई के घर में विज्ञान जगत की इस महान विभूति का जन्म हुआ था।

25 साल की उम्र में पाई पीएचडी की डिग्री
भारत के विज्ञान जगत में द्वितीय विश्व युद्ध की एक छोटी सी घटना ने अहम रोल अदा किया। महज 25 साल की उम्र में ही कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री पाकर छुट्टियों में भाभा भारत लौटे। यह संयोग ही था कि द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ जाने के कारण भाभा कैम्ब्रिज नहीं लौट सके और भारत में भौतिकी विज्ञान को नई ऊंचाईयां देने में लग गए। वह बंगलुरू के इंडियन स्कूल ऑफ साइंस से जुड़ गए। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सीवी रमन इस संस्थान के प्रमुख थे। यहीं से भाभा के नए सफर की शुरुआत हुई।

परमाणु वैज्ञानिक तैयार करने का था सपना
होमी जहांगीर भाभा का शुरू से मानना था कि परमाणु ऊर्जा देश के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। भाभा मानते थे कि अगर भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ा तो बिजली की सारी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने टाटा ट्रस्ट के प्रमुख सर दोराब टाटा से कहा भी था कि हम एक ऐसा संस्थान बनाते हैं, जहां से परमाणु वैज्ञानिक तैयार किए जा सकें। अगर ऐसा संस्‍थान बना तो आज से दशकों बाद भारत में परमाणु बिजली संयत्र लगाए जाएंगे तब देश को बाहर से लोग नहीं लाने पड़ेंगे। देश में ही काफी वैज्ञानिक तैयार होंगे।

भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की
भाभा के नेतृत्व में इंडियन स्कूल ऑफ साइंस में कॉस्मिक किरणों पर रिसर्च की गई। उस दौरान देश में कॉस्मिक किरणों पर रिसर्च के लिए अच्छी सुविधाएं नहीं थीं। भाभा ने इसी सेंटर में कॉस्मिक किरण रिसर्च यूनिट की स्थापना की। इसके बाद भौतिक विज्ञान की दिशा में भाभा नए-नए आयाम छूते गए। उन्होंने बंबई में जेआरडी टाटा के सहयोग से टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की। 1948 में उन्होंने भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की और अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

...और चला गया परमाणु पुरुष
इसके बाद भाभा ने अपना पूरा जीवन भारत में विज्ञान को आगे बढ़ाने में लगा दिया और वापस इंग्लैंड जाने का ख्याल छोड़ दिया।24 जनवरी 1966 में एक विमान हादसे में होमी जहांगीर भाभा की अकस्मात मृत्यु हो गई। भाभा एक महान स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने परमाणु वैज्ञानिक राजा रामन्ना से कहा था, "हमें परमाणु क्षमता रखनी चाहिए। पहले हमें खुद को साबित करना चाहिए, उसके बाद अहिंसा और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व के बारे में बात करनी चाहिए।" परमाणु क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हए अगर उन्हें 'परमाणु पुरुष' कहा जाए, तो गलत नहीं होगा।

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