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नक्सल विरोधी अभियान की कमजोर कड़ी हैं ये राज्य
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Fri, 14 Jun 2013 12:31 AM IST
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नक्सलियों ने पिछले करीब तीन सप्ताह में देश की सुरक्षा तंत्र को दूसरी बड़ी चुनौती दी है।
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25 मई को छत्तीसगढ़ के सुकमा में कांग्रेसी नेताओं पर हमले के बाद से इस बात का अंदेशा था कि नक्सली अगला हमला बिहार में कर सकते हैं।
बृहस्पतिवार को जमुई में ट्रेन पर हमला कर नक्सलियों ने इस अंदेशे को सच कर दिया।
गृह मंत्रालय इसे नक्सलियों की मजबूती कम, बिहार सरकार की कमजोरी ज्यादा मान रहा है।
केंद्र के अनुसार यह हमला नक्सल विरोधी अभियान के प्रति बिहार की उदासीनता का परिणाम है। केंद्र के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में बिहार और छत्तीसगढ़ सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं।
गृह मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री और शीर्ष पुलिस स्तर पर व्याप्त इस उदासीनता के चलते वहां तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बल का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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इस हालात को देखते हुए दो हफ्ते पहले गृह मंत्रालय ने बिहार सरकार को बिना इस्तेमाल पड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल की दो बटालियन को वापस भेजने का लिखित फरमान भेजा। इस दबाव के बाद बिहार पुलिस महानिदेशक ने फिलहाल उसके इस्तेमाल की योजना का ब्यौरा भेजा है।
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सूत्रों के मुताबिक राजनीति इच्छाशक्ति नहीं होने की वजह से कमजोर पड़े नक्सली छत्तीसगढ़ और बिहार में अब भी बड़े हमले करने में कामयाब हो रहे हैं।
पिछले दिनों ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश ने काफी सख्ती बरती है। झारखंड ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन बिहार केंद्र के अभियान को तवज्जो नहीं दे रहा।
सूत्रों के मुताबिक नक्सली पैसे की उगाही सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ से कर रहे हैं, जो उनके पूरे तंत्र के लिए ऑक्सीजन का काम कर रही है। इसका बड़ा हिस्सा सरकारी कब्जे से मुक्त तेंदू पत्ते की ठेकेदारी से आता है।
छत्तीसगढ़ सरकार तेंदू पत्ते के करोड़ों के व्यापार को रेगुलेट कर फंडिंग पर अंकुश लगा सकती है, लेकिन वहां की सरकार नक्सल विरोधी अभियान के मूलभूत बातों का ध्यान भी नहीं रख रही है।