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RTI में खुलासा, एक रुपये के नोट का खर्चा 1.14 रुपये

Thu, 02 Jul 2015 08:36 AM IST
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jul 2015 08:36 AM IST
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cost of making one rupee note is more than one rupee

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा फिर से एक रुपये का नोट छापने का फैसला सरकार के लिए गले की हड्डी साबित हो सकता है। इस समय सरकार को एक रुपये का एक नोट छापने का खर्च 1.14 रुपये पड़ रहा है। छापने के बाद इसे देश भर के बैंकों में पहुंचाने के लिए ढुलाई का खर्च अलग से बैठता है।

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आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चन्द्र अग्रवाल द्वारा सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में वित्त मंत्रालय की सरकारी कंपनी भारत प्रतिभूति मुद्रण एवं मुद्रा निर्माण निगम लमिटेड (एसपीएमसीआईएल) ने बताया कि एक रुपये के नोट की छपाई पर प्रति नोट 1.14 की लागत आ रही है।
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यह लागत भी अनऑडिटेड है, मतलब इसमें यदि प्रशासनिक और परिवहन व्यय जोड़ दिया जाए तो, इसकी लागत और भी बढ़ सकती है। देश में 1 रुपया का नोट पहले चलन में था।
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इसी वजह से बंद की गई थी नोट

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लेकिन इसकी छपाई की ज्यादा लागत और नोट के जल्द ही खराब होने की वजह से चलन से बाहर होने जैसे कारणों को देखते हुए करीब दो दशक पहले ही सरकार ने एक रुपया का नोट नहीं छापने का निर्णय लिया था।

उस समय कहा गया था कि इस मूल्य वर्ग में सिर्फ सिक्के ही ढाले जाएंगे क्योंकि धातु से बने सिक्के का जीवन कई दशक का होता है। इस तथ्य को जानते समझते हुए भी वित्त मंत्रालय ने 16 दिसंबर 2014 को एक अधिसूचना जारी कर फिर से 1 रुपया का नोट छापने का निर्णय लिया।

इसी के अनुरूप सरकारी नोट प्रेस में इस मूल्य वर्ग के नोट छपने शुरू हुए। हालांकि 1 रुपये के नए नोट अभी चलन में नहीं आए हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय में इस तरह के नोटों की पहली खेप पहुंच गई है।

नाम छपने के लिए इसलिए नष्ट हो रहे रुपए!

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देश में नोट छपाई की व्यवस्था पर नजर डालें, तो एक रुपये को छोड़ अन्य मूल्य वर्ग के नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर होता है, जबकि एक रुपये के नोट पर केंद्र सरकार के वित्त सचिव का हस्ताक्षर होता है।

वित्त मंत्रालय के ही कुछ अधिकारियों का कहना है कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम नोट पर छपे, इसके लिए जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये नष्ट किए जा रहे हैं। इससे बेहतर तो नए सिक्के ढालने का फैसला रहता।


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