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जंगल के 'राजा' को कुत्तों से खतरा
हल्द्वानी/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2013 12:36 PM IST
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जंगल के 'राजा' को कुत्तों से खतरा है। उनकी जिंदगी पर कुत्तों की वजह से मौत का साया मंडराने लगा है।
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आवारा कुत्तों के जरिये जंगल में बाघ, तेंदुआ जैसे वन्यजीवों में सीडीवी (केनाइन डिस्टेंपर वायरस) बीमारी पहुंच सकती है।
इसको लेकर नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने कार्बेट पार्क प्रबंधन को अलर्ट किया है। पार्क निदेशक के अनुसार बीमारी को लेकर सभी सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
बाघों की नाक में कुत्तों ने किया दम
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विभाष पांडव कहते हैं कि कुत्तों से सीडीवी बीमारी वन्यजीवों में ट्रांसमिट होती है। जब बाघ, तेंदुआ आदि उसका शिकार करते हैं तो वह खतरनाक वायरस उनमें पहुंच जाता है।
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यह बीमारी दिमाग को प्रभावित करती है। वन्यजीव में तेज बुखार, लकवा के रूप में इसके लक्षण देखने को मिलते हैं, जिसके बाद उनकी मौत हो जाती है। इस बार सुमात्रा (इंडानेशिया) के बाघों में (14 जून, 2013) यह बीमारी देखने को मिली है। बीमारी के खतरे को देखते हुए एनटीसीए और वन महकमा सतर्क हो गया है।
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मिल गया वो जीन जो बाघों को सफ़ेद बनाता है
एनटीसीए ने इसके लिए कार्बेट पार्क प्रबंधन को अलर्ट करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश भी भेजे हैं। इसमें यदि बाघ की मौत हो जाती है तो पोस्टमार्टम के बाद उसके जांच के लिए कौन से अंग भेजे जाने आदि हैं, उसका प्रोटोकॉल भेजा है। हर मौत में बीमारी के मद्देनजर जांच कराने को कहा गया है।
कार्बेट पार्क निदेशक समीर सिन्हा कहते हैं कि इस बार कुत्तों से सीडीवी को लेकर चिंता है। एनटीसीए के निर्देश के बाद आवश्यक कदम उठाए गए हैं। वन कर्मियों को बीमारी के बारे में जानकारी देने के साथ जंगल के क्षेत्र में आवारा कुत्ते नहीं पहुंचे इसके लिए कोशिशें की जा रही हैं।
तेंदुओं को ज्यादा खतरा
बाघ की तुलना में तेंदुआ कुत्तों का ज्यादा शिकार करता है। उसके प्रिय शिकार में कुत्ता शामिल है। उत्तराखंड में करीब 225 बाघ हैं। इसमें सौ से ज्यादा बाघ केवल कार्बेट पार्क में हैं। इसके अलावा तराई पूर्वी, रामनगर, हल्द्वानी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिम नैनीताल से लेकर राजाजी नेशनल पार्क और उससे सटे प्रभागों में हैं।