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दिल्ली गैंगरेपः दरिंदों को याद आए गांधी
विजय सिंघल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 12 Sep 2013 04:28 PM IST
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फांसी के फंदे का खतरा देखकर वसंत विहार गैंगरेप के चारो दोषियों को गांधी व गौतम बुद्ध के उपदेश व गुरुवाणी की याद आने लग गई।
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दोषियों ने अदालत से दया की भीख मांगी। उन्होंने तर्क रखा कि महापुरुषों ने कहा है कि यदि हम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो जीवन लेने का भी अधिकार भी नहीं।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि बापू ने तो अपने हत्यारे नत्थूराम गोडसे को माफ कर दिया था। इससे पहले अभियोजन पक्ष द्वारा मृत्युदंड की मांग करते ही दोषियों के चेहरे सन्न रह गए।
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विनय, अक्षय, पवन व मुकेश को तुरंत अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी व महात्मा बुद्ध की याद आ गई। चारों ने तुरंत सुधरने और भविष्य में कोई अपराध नहीं करने की बात कही।
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दोषी पवन के अधिवक्ता ने कहा महात्मा गांधी व महात्मा बुद्ध ने दोषियों को माफ कर उनको सुधरने का मौका दिया। इन्हीं सिद्धांतों को देखते हुए उनके मुव्वकिलों को भी सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए।
वहीं विनय व अक्षय के अधिवक्ता ने कहा कि महात्मा गांधी ने गोडसे को भी माफ कर दिया था। उन्होंने अदालत से दया की अपील करते हुए कहा उनके मुवक्किलों के पाप को नष्ट किया जाए न कि उनको।
उन्होंने कहा मृत्युदंड से अपराध कम नहीं होते। इसलिए उनके मुवक्किलों को सुधरने का मौका प्रदान किया जाए। इन दोनों के अलावा मुकेश के अधिवक्ता ने भी हाथ जोड़ कर अदालत से दया की भीख मांगी।
उन्होंने कहा कि गुरुवाणी में कहा गया है दया करो महाराज। उन्होंने हाथ जोड़ कर कहा कि जज साहब दया करो, मेरे मुवक्किल को सुधरने का मौका दे दो।