'मुझे जबरन बनाया मुस्लिम, फिर हिंदू बनूंगा'
यूपी में बड़ौत के गांव गढ़ी कंगरान निवासी एक व्यक्तिने रविवार को पुलिस के सामने यह आरोप लगाकर सनसनी फैला दी पांच साल पहले उसका और उसके तीन बच्चों का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें हिंदू से मुस्लिम बना दिया। धर्म परिवर्तन लालच देकर और डरा धमकाकर कराया। उसकी मर्जी के बगैर तीनों बच्चों को मदरसों में पढ़ाया। वह अब फिर से हिंदू बनना चाहता है। इसका पता चलते ही विहिप ने उनका शुद्धिकरण कर उनकी हिंदू धर्म में वापसी का ऐलान कर दिया। हालांकि पुलिस ने मामले की जांच करने की बात कही है।
शीशपाल शर्मा से मोहम्मद अब्दुल्ला बना 40 वर्षीय यह व्यक्तिअपनी पत्नी और चार बच्चों समेत रविवार को 12 बजे से पहले दिल्ली बस स्टैंड पर विहिप के जिलाध्यक्ष सहदेव सिंह से मिला। इसके बाद बड़ौत कोतवाली पहुंचा। सीओ बड़ौत सीपी सिंह ने उससे पूछताछ की। उसने बताया पांच साल पहले बड़ौत के ही एक मौलाना ने उसे बहला फुसलाकर गुमराह किया था। शामली का एक मौलाना भी उसके साथ था। वह उनकी बातों में आकर उनके साथ मुजफ्फरनगर के मीरापुर क्षेत्र के धर्म परिवर्तन के लिए चर्चित एक बड़े मदरसे में गया था।
वहां उसका और उसके तीन बच्चों मुकुल (10), शिवम (11) और तनु (आठ) का धर्म परिवर्तन कराकर तीनों के नाम क्रमश: सलमान, समीर और आयशा किए थे। सलमान को मदरसे में पढ़ने को जयपुर, समीर को पंजाब भेजा। जबकि आयशा को उसी मदरसे में रखा, जहां धर्म परिवर्तन कराया। इसके बाद वह लोनी में रह कर वॉल पेंटिंग का काम करने लगा।
बच्चों से मिलने नहीं दे रहे थे इसलिए चुप रहा
शीशपाल शर्मा से मोहम्मद अब्दुल्ला बने व्यक्ति ने बताया कि अब तक इसलिए चुप रहा, क्योंकि उसे उसके बच्चों से नहीं मिलने दिया जा रहा था। उसे डर था कि अगर पुलिस से शिकायत की तो बच्चों के साथ कुछ गलत न हो जाए। अब जैसे ही बच्चे उसके पास आए, वह पुलिस के पास आ गया।
कहा, उन लोगों का विश्वास जीतने के लिए उनके कहने पर एक साल पहले पटना निवासी मुस्लिम महिला रूबी से निकाह किया। इसके बाद उन्हें उस पर यकीन होने लगा कि यह फिर से हिंदू नहीं बनेगा। एक माह पहले ही उसे उसके तीनों बच्चे मिले और तभी उसने ठान लिया कि वह हिंदू धर्म में वापसी करेगा, इसलिए बीवी और बच्चों को लेकर बड़ौत चला आया।
तहरीर में लालच, धमकी का जिक्र
उसने बड़ौत कोतवाली में तहरीर भी दी। इसमें लिखा कि उसने पारिवारिक विवाद के चलते अपना मकान और जमीन बेच दी। उस परेशानी के दौर में उसका संपर्क बड़ौत के एक मौलाना से हुआ। उसने शामली के मौलाना से मिलवाया। दोनों ने उसे कुछ ऐसी बातें बताई, इससे उसका दिमाग घूम गया। इसके बाद उसे कभी लालच दिया जाता तो कभी डराया-धमकाया जाता। वह उनकी बातों में आ गया। उन्होंने जब उसका और उसके बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया तो उसे अहसास हुआ कि गलती हो गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
जल्द ही करवाएंगे शुद्धिकरण: सहदेव
विहिप के जिलाध्यक्ष सहदेव सिंह ने कहा शीशपाल से आबिद बने व्यक्तिके पूरे परिवार का जल्द ही शुद्धिकरण कराकर हिंदू धर्म में वापसी करवाई जाएगी। तब तक उसके रहन- सहन का इंतजाम किया जा रहा है। उसे कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। शीशपाल शर्मा से मोहम्मद आबिद बने व्यक्तिका निकाह जिस रूबी से हुआ है, उसने बताया वह आबिद के साथ रहना चाहती है। यदि वह कहेगा तो उसके साथ ही वह भी धर्म बदल लेगी।
सीओ सीपी सिंह ने बताया कि मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है। उसके बयान की वीडियो रिकार्डिंग करा ली गई है। जांच से पता चलेगा कि उसने जो आरोप लगाए हैं, उनमें कितनी सच्चाई है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आगरा: फिर ‘धर्मांतरण’ का हल्ला
आगरा के नैनाना जाट में एक बार फिर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का हल्ला मचा। लंबे समय से सामुदायिक केंद्र पर ईसाई समाज का कब्जा होने के कारण लोगों का आक्रोश भड़क गया। सामुदायिक केंद्र के जिस हॉल में ईसाई धर्म से जुड़े चित्र और संदेश लगे थे, उन्होंने उस पर ताला डाल दिया। इस हॉल के दरवाजे पर ईसाई समाज का पहले से ही एक ताला लगा हुआ था। सप्ताह भर पहले भी यहां ईसाई समाज के लोगों द्वारा सत्संग व धर्मपरिवर्तन कराने का हल्ला मचा था।
रविवार सुबह भाजयुमो के कुछ पदाधिकारी सदस्यता कैंप लगाने नैनाना जाट पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उनसे सामुदायिक केंद्र पर ईसाई समाज का कब्जा होने की बात कही। सामुदायिक केंद्र के हॉल की खिड़की से झांककर पदाधिकारियों ने देखा तो उसमें ईसाई धर्म से जुड़े चित्र और संदेश लगे मिले।
ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि लंबे समय से यहां सप्ताह में दो बार प्रार्थना सभा होती है, जिसमें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रार्थना सभा में ग्रामीणों को धार्मिक किताबें और सामग्री बांटी जाती हैं। इस पर भाजयुमो के पदाधिकारियों ने हॉल पर ताला लगा दिया। सामुदायिक केंद्र के दूसरे कमरों में भी ईसाई धर्म प्रचारक ने ताला लगा रखा है। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष सोनू चौधरी का कहना है कि सरकारी भवन को धार्मिक स्थल के रूप में परिवर्तित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
किराए पर लिया सामुदायिक केंद्र
सामुदायिक केंद्र में प्रार्थना सभा कराने वाले राजेंद्र सिंह ने बताया कि यह भवन पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह से प्रार्थना सभा के लिए किराए पर लिया था। उन्होंने इसे न सिर्फ स्वच्छ कराया, बल्कि भवन की मरम्मत भी करवाई। हर रविवार को वह यहां प्रार्थना सभा कराते थे। धार्मिक सामग्री रखे होने के कारण उन्हीं ने हॉल पर ताला डाला था।
प्रार्थना सभा की नहीं थी जानकारी
पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने भवन को किराए पर नहीं दिया था, बल्कि देखरेख के लिए दिया था। किराए के रूप में जितनी धनराशि का प्रस्ताव दिया था, उसको भवन की देखरेख पर ही खर्च करने को कहा था। राजेंद्र सिंह ने उन्हें सामुदायिक केंद्र पर प्रार्थना सभा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी।
धर्म जागरण समिति के अलीगढ़ संयोजक पर मुकदमा दर्ज
धर्मांतरण को लेकर बयानबाजी रोकने को भाजपा द्वारा कड़े कदम उठाने की सुगबुगाहट के बीच पुलिस भी अपनी साख बचाने में जुट गई है। धर्म जागरण समिति के जिला संयोजक सत्यप्रकाश नवमान के खिलाफ पुलिस ने खुद हरदुआगंज थाने में भड़काऊ बयान देने का मुकदमा पंजीकृत किया है।
यह मुकदमा पुलिस ने उस फजीहत से बचने के लिए किया है जो नवमान के बयान के बाद पैदा हो गई थी। नवमान ने 25/26 दिसंबर को कहा था कि हरदुआगंज क्षेत्र के 15 गांवों में धर्मांतरण कार्यक्रम के तहत घर वापसी हुई है। नवमान के इस दावे से स्थानीय पुलिस की किरकिरी हो रही थी और वह उच्चाधिकारियों के सामने इस बात के कोई साक्ष्य नहीं दे सकी कि ऐसा नहीं हुआ।
एसओ हरदुआगंज पहलवान सिंह यादव की ओर से धारा 153ए के तहत शनिवार देर रात यह मुकदमा सत्यप्रकाश नवमान निवासी सराय रतनलाल कोतवाली के खिलाफ दर्ज किया गया है। इसमें आरोप है कि 25/26 दिसंबर को सत्यप्रकाश नवमान ने बयान दिया कि हरदुआगंज क्षेत्र के गांव गिरधरपुर, छिड़ावली, बरकातपुर सहित 15 गांवों में धर्मांतरण के तहत घर वापसी हुई है। उसी के तहत स्वागत के लिए यह हवन यज्ञ कराए जा रहे हैं। एसओ ने यह मुकदमा दर्ज करने की पुष्टि करते हुए बताया कि मुकदमा संज्ञेय अपराध का है। इसमें गिरफ्तारी संभव है।
कबाड़ बस्ती खाली करने की तैयारी
देश भर में धर्मांतरण प्रकरण की आग आगरा की जिस बस्ती से भड़की वहां रविवार को बारावफात के मौके पर उल्लास का कोई माहौल नहीं था। उल्टा बस्ती के लोग कहीं और जाने की तैयारी में हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले दिनों बस्ती में पहुंचे कई मौलानाओं के प्रस्ताव के बाद यह लोग करबला की जमीन पर डेरा डाल सकते हैं। बस्ती के ठेकेदार इस्माइल की पत्नी मुनिरा बेगम का कहना है कि जमीन का मालिक उनसे जगह खाली कराने को लेकर दबाव डाल रहा है। वैसे भी बस्ती के लोग अब यहां नहीं रहना चाहते। जल्द ही बस्ती खाली कर देंगे। बोलीं, पिछले दिनों कुछ मौलाना आए थे, उन्होंने करबला की जमीन पर डेरा डालने का प्रस्ताव रखा है।
गौरतलब है कि वेद नगर स्थित कबाड़ बस्ती 37 परिवारों ने आठ दिसंबर को हिंदू धर्म अपना लिया था। मगर, अगली ही सुबह सभी ने हिंदूवादी संगठन के नेताओं पर लालच देने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन को नकार दिया था।
दस परिवारों ने दी इस्लाम कबूल करने की चेतावनी
बालैनी बागपत स्थित वाल्मीकि आश्रम में पूजा करने की अनुमति न मिलने पर दौराला के गांव जमालपुर गोमा के 10 वाल्मीकि परिवारों ने इस्लाम कबूल करने की चेतावनी दी है।
समाज के लोगों का आरोप है कि वे इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त समेत अन्य नेताओं से भी कर चुके हैं, मगर महंत और एक बिरादरी के लोग पूजा नहीं करने देते हैं। इससे क्षुब्ध वाल्मीकि परिवार के 60 लोगों ने 26 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। मेरठ के जिलाधिकारी पंकज यादव ने बताया कि किसी को भी पूजा करने से रोकना गलत है। इस पर कार्रवाई हो रही है।
जमालपुर गोमा निवासी वाल्मीकि समाज के ग्रामीण श्याम सिंह, किरण सिंह, आनंद, महकार आदि का कहना है कि बालैनी में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम है। जहां सीता सती हुई थीं और यह लव और कुश की जन्मभूमि भी है। उनका आरोप है कि वे 8 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर आश्रम में बने वाल्मीकि मंदिर में पूजा करने गए थे, मगर कुछ दबंगों ने पूजा नहीं करने दी और भगा दिया। इसकी शिकायत एसडीएम बागपत से की गई तो उन्होंने पूजा करने के आदेश दिए, लेकिन बालैनी पुलिस ने मदद नहीं की।