अमेरिका के मोदी से डरने वाले पोस्टर पर छिड़ी जंग
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इन दिनों नरेंद्र मोदी को लेकर काफी कुछ चल रहा है। बनारस से उनके लड़ने के ऐलान के बाद अब सारी निगाह लोकसभा की इस सीट पर टिक गई हैं। लेकिन साथ ही उन्हें लेकर विवाद भी लगातार हो रहे हैं।
इस बार विवाद एक पोस्टर को लेकर है, जिसमें लिखा है, "अमेरिका, मोदी से डरता है, क्योंकि वो जानता है कि मोदी भ्रष्ट नहीं हैं।" इस पोस्टर में व्हिसलब्लोअर जूलियन असांज की तस्वीर और उनके दस्तखत दिख रहे हैं।
असांज दुनिया के सबसे चर्चित व्हिसरब्लोअर हैं, जिनकी विकिलीक्स ने अमेरिकी एजेंसियों में दबी-छिपी खुफिया जानकारी को दुनिया के सामने लाकर तहलका मचा दिया था। लेकिन मोदी के इस पोस्टर पर नई जंग छिड़ गई है।
विकिलीक्स का भाजपा पर हमला
विकिलीक्स ने सोवमार को कहा कि भाजपा ने अपने प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सपोर्ट में जो एंडोर्समेंट आगे बढ़ाया है, वो फर्जी है और उसमें कोई दम नहीं है।
सिलसिलेवार ट्वीट्स के जरिए विकिलीक्स ने दावा किया है कि उसने कभी नहीं कहा कि मोदी भ्रष्ट नहीं हैं। भाजपा के समर्थक इन चुनावों में मोदी की इसी छवि को सामने रख रहे हैं।
यहां तक कि भाजपा के कुछ पोस्टरों में भी कथित तौर पर इस विकिलीक्स वाले पोस्टर का इस्तेमाल किया गया है। विकिलीक्स ने कहा, "वो शायद लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा नेता माना जाता है कि जो भ्रष्ट नहीं है।"
मोदी पर हमला बोलने का नया हथियार
यह पोस्टर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को गुजरात के मुख्यमंत्री के खिलाफ नया हमला बोलने का सामान मुहैया करा सकता है। राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने हालिया रैलियों में मोदी के विकास के दावों पर काफी हमले किए थे।
हालांकि, भाजपा ने इन ट्वीट को ज्यादा तरजीह नहीं दी। पार्टी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, "हमें मोदीजी पर विकिलीक्स या असांज से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।"
यह विवाद साल 2006 का है, जब अमेरिकी राजदूत और मुंबई के कोंसुलर जनरल माइकल एस ओवन ने मोदी से मुलाकात की थी। यह जानकारी विकिलीक्स ने दी थी।
मोदी से हाल में हुई नैंसी की मुलाकात
विकिलीक्स ने इस बैठक के मिनट्स पर आधारित केबल पब्लिश किया था, जिसमें सारा ब्योरा दिया गया था। अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल ने फरवरी में मोदी से मुलाकात की थी।
गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दाग की वजह से अमेरिका ने करीब आठ साल नरेंद्र मोदी का बहिष्कार किया। अमेरिका ने साल 2005 में मोदी को डिप्लोमेटिक वीजा देने से मना कर दिया था।
विकिलीक्स की केबल के मुताबिक ओवेन और मोदी ने गुजरात के विकास, राज्य में निवेश और साम्प्रदायिकता पर चर्चा की थी। इसमें वो हिस्सा खास तरह से उठाया गया जिसमें राजकोट कांग्रेस के नेता मनोहरसिंह जडेजा ने कहा था कि मोदी की उपलब्धियों से इनकार नहीं किया जा सकता।
मोदी की पुरानी बातचीत का केबल
विकिलीक्स ने ट्वीट में कहा, "मोदी भ्रष्ट नहीं हैं, यह कोट मनोहरसिंह की तरफ से आया था।" केबल में ओवेन के नोट के हवाले से कहा गया है, "निश्चित तौर पर मोदी 2002 की हिंसा के लिए माफी नहीं मांगेंगे और न हटेंगे...लेकिन हमारा मानना है कि मोदी पर सिंहजी का बयान वाकई सच है।"
2011 में जब यह केबल जारी किया गया था, तो भारतीय जनता पार्टी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा था। उस वक्त पार्टी ने मोदी की ईमानदारी और गुजरात के विकास मॉडल को उठाया था।
यूं इस मामले में कितना भी दम क्यों न हो। लेकिन चुनावी मौसम में कौन सा मुद्दा कितना बढ़ा दिया जाता है, यह सिर्फ सियासत तय करती है।