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कसाब पर खर्च को लेकर केंद्र, महाराष्ट्र में तनातनी

Fri, 26 Oct 2012 09:36 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 26 Oct 2012 09:36 PM IST
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controversy Kasab security spending

मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल कसाब की सुरक्षा पर हो रहे खर्च के बारे में राय मशविरे के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है। केंद्र का मानना है कि कसाब पर अब तक हुए करोड़ों रुपये का खर्च प्रशासनिक मसला है। इस पर उठे विवाद पर बिना बहस किए किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता।

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शुक्रवार को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने केंद्र की इस दुविधा की जानकारी दी। गौरतलब है कसाब की सुरक्षा पर अब तक करीब 35 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च हो चुके हैं। 2009 से कसाब की सुरक्षा में तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का अगस्त महीने तक का बिल 29 करोड़ रुपये है।
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मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद कसाब की सुरक्षा के लिए जेल के भीतर और बाहर आईटीबीपी के 150 जवान तैनाती पर हैं। इस पर विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र सरकार ने यह रकम बिना केंद्र के दखल के देने से इनकार कर दिया।
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इसके अलावा कसाब को जिस सेल में रखा गया है वह अंडे के आकार के बने उस भाग में है जहां कुख्यात अपराधियों को रखा जाता है। कसाब के आने के बाद जेल प्रशासन को वहां की सुरक्षा के लिए कई तरह के खास इंतजाम करने पड़े। दरअसल 26/11 की घटना के बाद गिरफ्तार एक मात्र पाकिस्तानी आतंकी कसाब की जान को लेकर खुफिया विभाग ने सरकार को चेताया था।

खुफिया विभाग के मुताबिक पाकिस्तान की चुनिंदा एजेंसियां इतनी बड़ी साजिश को अंजाम देने के बाद पकड़े गए आतंकी को जेल के भीतर ही मारने की पूरी कोशिश कर सकती हैं। लिहाजा उसके खाने से लेकर जरूरी इस्तेमाल की चीजों को भी काफी ठोक बजा कर उसके पास पहुंचाया जाता है। इस पर प्रशासन के लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं।


गृह मंत्रालय ने परंपरा से हटकर तीन हफ्ते के भीतर ही कसाब की क्षमा याचिका को खारिज कर राष्ट्रपति के पास भेज दिया है। इसके पहले महाराष्ट्र सरकार ने भी इसे खारिज करते हुए अपनी राय दी थी कि कसाब की फांसी की सजा पर जल्द से जल्द अमल किया जाए। अब उसकी फांसी पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अंतिम फैसला लेना है। सरकार के उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक इस क्षमा याचिका के फैसले पर अब ज्यादा देर नहीं लगेगा।

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