'कांग्रेस के पैसे' से नेताजी की मौत पर घमासान!
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आजादी की लड़ाई के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य देशवासियों के लिए भले ही आज तक एक अबूझ पहेली बना हुआ हो, लेकिन उनके परिवार की आंतरिक कलह खुलेतौर पर उभरकर सामने आ गई है।
नेताजी की मौत के राज और उनकी पैतृक संपत्ति को लेकर उनके दो सगे भतीजों में ही महाभारत छिड़ गया है। विवाद इस कदर बढ़ चुका है कि एक भतीजे ने दूसरे पर विमान हादसे में नेताजी की मौत का रहस्य दबाने के एवज में पूर्व की कांग्रेस सरकार से मोटी रकम लेने का आरोप लगाया है।
इस लड़ाई में एक तरफ हैं तृणमूल कांग्रेस के सांसद और जाने-माने इतिहासकार सुगाता व उनकी मां कृष्णा बोस जबकि दूसरी तरफ हैं चंद्र कुमार। सुगाता नेताजी रिसर्च ब्यूरो के संचालक हैं और चंद्र कुमार एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये दोनों ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप की मांग
सुगाता पर 'नेताजी रिसर्च ब्यूरो' और उनकी पैतृक संपत्ति 'नेताजी भवन' को हथियाने का आरोप लगाते हुए चंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
नेताजी भवन का निर्माण सुभाष चंद्र बोस के पिता जानकीनाथ बोस ने कराया था। बाद में जानकीनाथ के बड़े बेटे शरत चंद्र ने इसमें नेताजी रिसर्च ब्यूरो की स्थापना की, जिसे इस समय सुगाता चला रहे हैं।
हालांकि चंद्र कुमार के लगाए गए आरोपों पर सुगाता या उनकी मां ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जिस तरह यह विवाद बढ़ रहा है, उससे धीरे-धीरे नेताजी की मौत के रहस्य का मुद्दा पीछे छूटता नजर आ रहा है।
'इन्हीं पारिवारिक सदस्यों ने मानी नेताजी की मौत की थ्यौरी'
वहीं, इस विवाद में कूदते हुए शरत चंद्र की सबसे छोटी बेटी चित्रा घोष ने कहा, 'मैं इस ब्यूरो की आजीवन सदस्य हैं, बावजूद इसके उन्हें इस भवन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि उन्हें भवन में होने वाले किसी कार्यक्रम में बुलाया तक नहीं जाता।'
चंद्र कुमार के मुताबिक एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि रिसर्च ब्यूरो को 2010-11 में दो चरणों में एक करोड़ 18 लाख रुपए मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि ब्यूरो को पिछले 10 सालों में 20 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की रकम मिली है।
रिसर्च ब्यूरो के पूर्व सदस्य और इतिहासकार चित्रब्रत पलित का कहना है कि साल 2000 में सुगाता के पिता शिशिर बोस की मौत के बाद सुगाता और उनका मां कृष्णा ने इस संस्था पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने नेताजी के इन्हीं पारिवारिक सदस्यों की सहमति से यह घोषित कर दिया कि नेताजी की मौत ताइहुकू में विमान हादसे में हो गई थी।
मुखर्जी आयोग ने किया था नेताजी की मौत का खंडन
वहीं, पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों का गलत बताया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मानस भूइया का इस मामले पर कहना है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद और झूठ हैं। कुछ लोग परिवार के छोटे-मोटे विवाद को राजनीतिक रंग देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सुगाता और कृष्णा बोस जाने-माने हस्ती हैं। नेताजी रिसर्च ब्यूरो काफी अच्छा काम कर रहा है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस संस्था को कुछ लोग बदनाम करने पर तुले हैं।
गौरतलब है कि नेताजी की मौत के रहस्य को लेकर 1999 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी के नेतृत्व में तीसरे आयोग का गठन किया था।
2006 में डीएनए टेस्ट के आधार पर इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि विमान दुर्घटना में मिली राख असल में एक जापानी सिपाही की थी। इस रिपोर्ट के बारे में रिसर्च ब्यूरो ने कोई खास टिप्पणी नहीं की थी।